President Donald Trump जल्द ही Vladimir Putin के साथ साइबेरिया में फैली एक रहस्यमयी बीमारी पर चर्चा करेंगे। निवेशकों के लिए यह घटना बेहद संवेदनशील है क्योंकि **18 अक्टूबर 2026** तक अमेरिका को रूसी कंपनियों पर नए सैंक्शंस और भारी टैरिफ लगाने का फैसला लेना है, जो ग्लोबल एनर्जी मार्केट में हलचल मचा सकता है।
साइबेरिया के 'इर्कुटस्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट' में एक लैब वर्कर की रहस्यमयी बीमारी से मौत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। इस घटना के बाद करीब 200 लोगों को क्वारंटीन किया गया है। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अभी इसे कम जोखिम वाला बताया है, लेकिन जिस तरह की रिसर्च इस लैब में होती है, उसने वैश्विक कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
यह कूटनीतिक बातचीत ऐसे समय पर हो रही है जब अमेरिका 'Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act' के तहत कड़े कदम उठाने की तैयारी में है। 18 सितंबर 2026 को कानून बनने के बाद, अब 18 अक्टूबर 2026 की डेडलाइन तय की गई है।
- भारी टैरिफ का खतरा: रूसी एनर्जी रिसोर्सेज के बड़े खरीदारों पर 100% से लेकर 500% तक का टैरिफ लगाया जा सकता है।
- सप्लाई चेन का रिस्क: यदि रूस पारदर्शिता नहीं बरतता है, तो अमेरिका अपनी कार्रवाई को और आक्रामक बना सकता है।
मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि यह अनिश्चितता एनर्जी और कमोडिटी सेक्टर के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। ट्रेडर्स अब US स्टेट डिपार्टमेंट और ट्रेजरी के आधिकारिक बयानों पर नजर गड़ाए हुए हैं, क्योंकि यही निर्णय ग्लोबल एनर्जी प्राइसेज में बड़ी वोलेटिलिटी (Volatility) ट्रिगर कर सकते हैं।
