नवंबर 2026 के मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद US डिफेंस सेक्रेटरी Pete Hegseth पर दबाव बढ़ गया है। मार्केट की नजरें **$1.5 ट्रिलियन** के अटके हुए डिफेंस बजट और ईरान विवाद पर जारी जांच पर टिकी हैं।
नवंबर 2026 के चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के हाथों से हाउस और सीनेट निकलने के बाद अमेरिकी सियासत में भूचाल आ गया है। इस हार के बाद डिफेंस सेक्रेटरी Pete Hegseth की कुर्सी पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। हालांकि राष्ट्रपति Donald Trump ने सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन किया है, लेकिन वाशिंगटन के गलियारों में हलचल तेज है।
बजट पर 'डेडलॉक' का असर
इन्वेस्टर्स के लिए सबसे बड़ी चिंता $1.5 ट्रिलियन का वह डिफेंस पैकेज है जो फिलहाल राजनीतिक खींचतान में फंस गया है। चूंकि जनवरी 2027 से कांग्रेस में डेमोक्रेटिक पार्टी का दबदबा होगा, इसलिए इस भारी-भरकम फंड को पास कराना मौजूदा सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। इस देरी का सीधा असर उन डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर्स पर पड़ेगा, जो सरकारी प्रोजेक्ट्स और अप्रूवल्स पर निर्भर हैं।
ईरान विवाद और जांच का दबाव
ईरान के साथ जारी संघर्ष इस हार की एक बड़ी वजह माना जा रहा है। विपक्षी दल अब इस पूरे मामले की जांच की तैयारी कर रहे हैं। Representative Thomas Massie ने Hegseth के खिलाफ महाभियोग (Impeachment) तक की अर्जी दाखिल कर दी है, जिससे पेंटागन के कामकाज में बड़ी रुकावट आ सकती है। अटकलें यह भी हैं कि सरकार Hegseth को Tennessee गवर्नर-इलेक्ट द्वारा खाली की गई सीनेट सीट पर भेजकर विवाद सुलझाने की कोशिश कर सकती है।
इन्वेस्टर्स क्या देखें?
अगले कुछ हफ्तों में 'लेम-डक' सत्र (Lame-duck session) के दौरान बजट पास होता है या नहीं, यह डिफेंस सेक्टर के शॉर्ट-टर्म आउटलुक के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। बाजार के एक्सपर्ट्स का मानना है कि नई लीडरशिप या डिफेंस नीति में किसी भी बदलाव का सीधा असर ग्लोबल जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम पर पड़ेगा।
