ट्रंप प्रशासन के नए नियमों के बाद अंतरराष्ट्रीय छात्रों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। US सरकार ने Curricular Practical Training (CPT) के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसके चलते UCLA और UC Berkeley जैसी बड़ी यूनिवर्सिटीज ने वर्क ऑथोराइजेशन (Work Authorization) आवेदनों पर रोक लगा दी है।
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए वर्क परमिट के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। 24 अगस्त, 2026 को जारी किए गए एक मेमो के जरिए सभी यूनिवर्सिटीज को CPT के नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। जो संस्थान इन मानकों को पूरा नहीं करेंगे, उनका विदेशी छात्रों को दाखिला देने का अधिकार छीना जा सकता है।
प्रमुख यूनिवर्सिटीज का बड़ा फैसला
नियमों के इस अचानक बदलाव के बाद University of California, Los Angeles (UCLA) और UC Berkeley जैसे बड़े शिक्षण संस्थानों ने CPT आवेदन प्रक्रिया को फिलहाल सस्पेंड कर दिया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि वे संघीय सरकार (Federal Government) के नए नियमों के साथ तालमेल बिठाने के लिए अपनी आंतरिक नीतियों की समीक्षा कर रहे हैं। इस फैसले से उन छात्रों के लिए अनिश्चितता पैदा हो गई है जो अपनी पढ़ाई और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के लिए इन इंटर्नशिप पर निर्भर हैं।
क्या है भविष्य की चुनौती?
यह केवल इंटर्नशिप तक सीमित नहीं है, बल्कि 15 सितंबर, 2026 से एक बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। इसके तहत F-1 और J-1 वीजा वाले छात्रों के लिए 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' की पुरानी व्यवस्था खत्म होकर 4 साल की निश्चित समय-सीमा लागू हो जाएगी। यदि किसी छात्र का प्रोग्राम 4 साल से ज्यादा का है, तो उसे US Citizenship and Immigration Services से विशेष मंजूरी लेनी होगी। यह नियम खास तौर पर PhD और रिसर्च आधारित STEM प्रोग्राम्स के लिए एक बड़ी प्रशासनिक बाधा बनने वाला है।
माहौल और भी सख्त
आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा प्रशासन के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से अब तक 6,000 से ज्यादा स्टूडेंट वीजा रद्द किए जा चुके हैं। इसके अलावा, US स्टेट डिपार्टमेंट ने कंसुलर स्टाफ को नई स्क्रीनिंग ट्रेनिंग देने के लिए ग्लोबल स्तर पर वीजा अपॉइंटमेंट्स को भी फिलहाल रोक दिया है। छात्रों और यूनिवर्सिटीज के लिए अब चुनौती बढ़ गई है क्योंकि वीजा रद्दीकरण का खतरा और शैक्षणिक कैलेंडर में देरी आने वाले समय में बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।
