TikTok ने अलबामा के साथ **$100 मिलियन** का कानूनी समझौता किया है, जिससे कंपनी ने किशोरों की सुरक्षा को लेकर लगे आरोपों को शांत करने की कोशिश की है। भारत में बैन होने के बावजूद, यह वैश्विक स्तर पर सोशल मीडिया कंपनियों के लिए बढ़ते रेगुलेटरी दबाव को दर्शाता है।
सुरक्षा नियमों पर सख्ती
ByteDance के मालिकाना हक वाले इस प्लेटफॉर्म ने इस समझौते के साथ एक बड़े पब्लिक ट्रायल को टाल दिया है। समझौते के तहत, TikTok को किशोर यूजर्स के लिए कड़े सेफ्टी प्रोटोकॉल लागू करने होंगे। अब ऐप पर 2 घंटे की डेली टाइम लिमिट होगी और मध्यरात्रि से सुबह 6:00 बजे तक एक्सेस पर रोक रहेगी। साथ ही, स्कूल के घंटों के दौरान नोटिफिकेशन बंद रहेंगे और नाबालिगों के लिए 'ब्यूटी फिल्टर' डिसेबल कर दिए जाएंगे।
निवेशकों के लिए संकेत
इन्वेस्टर्स के लिए यह खबर काफी अहम है, क्योंकि यह वैश्विक स्तर पर टेक कंपनियों के लिए बढ़ते सरकारी दखल का हिस्सा है। भले ही भारत में TikTok 2020 से बैन है, लेकिन Meta (Instagram, Facebook) और Alphabet (YouTube) जैसी कंपनियां भी ऐसी ही कड़ी निगरानी के दायरे में हैं।
आर्थिक जोखिम का दायरा
समझौते में एक विशेष शर्त भी है: यदि अमेरिका के अन्य राज्य भी इसी तरह के सेटलमेंट करते हैं, तो यह पेआउट बढ़कर $300 मिलियन तक पहुंच सकता है। अभी भी कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क समेत एक दर्जन से ज्यादा राज्यों में कानूनी लड़ाइयां जारी हैं।
मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि इन बदलावों का असर प्लेटफॉर्म के 'डेली एक्टिव यूजर्स' और 'एन्गेजमेंट टाइम' पर पड़ सकता है, जो सीधे तौर पर इन कंपनियों की एड रेवेन्यू (Ad Revenue) को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
