Tibet-Nepal बॉर्डर पर **4.4** तीव्रता के भूकंप के बाद बड़ा लैंडस्लाइड हुआ है। Gyirong Port पर पार्किंग स्ट्रक्चर ढहने से **384** लोग लापता हैं, जिनमें **105** भारतीय शामिल हैं।
तबाही का मंजर
बीते 26 अगस्त, 2026 को तिब्बत और नेपाल के बॉर्डर पर स्थित Gyirong Port एक बड़ी प्राकृतिक आपदा का केंद्र बन गया। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज के अनुसार, भूकंप के झटके आने के ठीक 7 मिनट बाद एक विशाल मडस्लाइड (कीचड़ का बहाव) और अचानक आई बाढ़ ने भोटे कोशी नदी के किनारे भारी तबाही मचा दी। इस घटना में एक बहुमंजिला पार्किंग सुविधा पूरी तरह ध्वस्त हो गई, जिसके मलबे में कई वाहन और लोग दब गए हैं।
गंभीर मानवीय संकट और भारतीय कनेक्शन
नेपाल टूरिज्म बोर्ड के मुताबिक, फिलहाल 384 यात्री लापता हैं। दुखद यह है कि इनमें 105 भारतीय नागरिक और 37 एनआरआई शामिल हैं। नेपाल में आई इस फ्लैश फ्लड के कारण अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। बचाव कार्य में सबसे बड़ी चुनौती 1.5 मीटर तक जमा हुई गाद और मिट्टी की परत है। इसके अलावा, क्षेत्र में लगातार हो रही भूगर्भीय अस्थिरता बचाव दलों के लिए बड़ा खतरा बनी हुई है।
उत्तर भारत पर असर
इस हादसे के बाद बॉर्डर से होने वाला व्यापार और पर्यटन पूरी तरह ठप हो गया है। हिमालयी कॉरिडोर की कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर पर अब सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ी चिंता भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार राज्यों को लेकर है, जहाँ प्रशासन ने डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों के लिए हाई-अलर्ट जारी कर दिया है। मलबे के कारण नदियों के बहाव में रुकावट आने से अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ गया है, जो निचले इलाकों में बने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को नुकसान पहुंचा सकता है।
आगे की चुनौतियां
आने वाले दिनों में रेस्क्यू टीम की सफलता पूरी तरह से मौसम और जमीन की स्थिरता पर निर्भर करेगी। एक्सपर्ट्स ने और अधिक लैंडस्लाइड की चेतावनी दी है। जब तक मलबे को साफ नहीं किया जाता और पुलों व सड़कों की मजबूती की जांच नहीं होती, तब तक इस प्रमुख ट्रांजिट रूट का खुलना मुश्किल है। फिलहाल, प्रशासन नदियों के जलस्तर और बिजली आपूर्ति को बहाल करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
