TSMC का AI बूस्ट: MSCI EM इंडेक्स में छाया, भारत की हिस्सेदारी 6 साल के निचले स्तर पर

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
TSMC का AI बूस्ट: MSCI EM इंडेक्स में छाया, भारत की हिस्सेदारी 6 साल के निचले स्तर पर
Overview

AI क्रांति का असर MSCI इमर्जिंग मार्केट्स (EM) इंडेक्स पर साफ दिख रहा है। ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) अब इस इंडेक्स में **14.2%** के वेटेज के साथ सबसे बड़ी कंपनी बन गई है। इस वजह से ताइवान इंडेक्स में टॉप पर पहुंच गया है, जबकि भारत का वेट पिछले छह साल के सबसे निचले स्तर **11.94%** पर आ गया है।

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AI के बूम से TSMC का जलवा, इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स पर छाया

AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की बढ़ती मांग के चलते ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) का दबदबा MSCI इमर्जिंग मार्केट्स (EM) इंडेक्स में बढ़ गया है। यह किसी एक कंपनी का पिछले 30 सालों में सबसे बड़ा वेटेज है। TSMC के इस कमाल के बाद ताइवान अब MSCI EM इंडेक्स में 24.84% वेटेज के साथ पहले नंबर पर काबिज हो गया है, जिसने चीन को पीछे छोड़ दिया है। दुनिया की सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनी TSMC का मार्केट कैप (Market Cap) लगभग $2.04 ट्रिलियन तक पहुंच गया है।

वैल्यूएशन में बड़ा अंतर: AI कंपनियाँ बनाम पारंपरिक कंपनियाँ

AI का यह랠 वैल्यूएशन (Valuation) में बड़ा अंतर पैदा कर रहा है। TSMC का P/E रेशियो (Price-to-Earnings Ratio) 4 मई 2026 तक लगभग 37.66 है, जो इसके सामान्य दायरे से काफी ऊपर है। वहीं, विदेशी ब्रोकरेज (Brokerage) हाउस AI सप्लाई चेन में ताइवान और साउथ कोरिया को बेहतर दांव मान रहे हैं। दूसरी ओर, भारत के सेंसेक्स (Sensex) में साल-दर-साल 4.49% की गिरावट देखी गई है (5 मई 2026 तक), और MSCI इंडिया 16% नीचे है। HDFC बैंक जैसे भारतीय शेयरों का P/E रेशियो करीब 15.6-15.69 और रिलायंस इंडस्ट्रीज का करीब 22.24 है, जो हाई-ग्रोथ टेक की जगह पारंपरिक इंडस्ट्रीज के अनुरूप हैं।

इंडेक्स कंसंट्रेशन का खतरा बढ़ा

MSCI EM इंडेक्स, जिसे इमर्जिंग मार्केट्स में डाइवर्सिफिकेशन (Diversification) के लिए बनाया गया है, अब कंसंट्रेशन (Concentration) के बड़े जोखिम का सामना कर रहा है। इंडेक्स के टॉप 10 शेयरों का वेटेज अब 34.64% हो गया है, जो कई सालों में सबसे ज्यादा है। इसका मतलब है कि इंडेक्स का प्रदर्शन कुछ बड़ी टेक कंपनियों पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है, जिससे पैसिव फंड (Passive Fund) निवेशकों को तगड़ा झटका लग सकता है।

भारत की घटती हिस्सेदारी

MSCI EM इंडेक्स में भारत का वेटेज घटकर 11.94% रह गया है, जो छह साल से अधिक समय में सबसे कम है। सितंबर 2024 में यह लगभग 21% के अपने चरम पर था। इसका मुख्य कारण भारत का सेक्टर मिक्स है, जिसमें फाइनेंशियल, कंज्यूमर स्टेपल्स और आईटी सर्विसेज का ज्यादा दबदबा है, जबकि AI हार्डवेयर से सीधा जुड़ाव कम है। HDFC बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े भारतीय शेयरों का MSCI EM में वेटेज केवल 0.79% है। इस दौरान, MSCI EM इंडेक्स में 46% की बढ़त के मुकाबले ताइवान के शेयरों में 77% और साउथ कोरिया में 124% का उछाल आया है।

कंसंट्रेशन का जोखिम: टेक दिग्गजों का दबदबा खतरनाक

कुछ टेक दिग्गजों, खासकर TSMC, के बड़े वेटेज के कारण, MSCI EM इंडेक्स AI पर एक केंद्रित दांव बन गया है। इसमें महत्वपूर्ण जोखिम शामिल हैं। अगर TSMC या अन्य AI कंपनियों को सप्लाई चेन, भू-राजनीतिक समस्याओं या AI में निवेश की घटती रुचि जैसी अप्रत्याशित चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, तो इंडेक्स के प्रदर्शन पर गंभीर असर पड़ेगा। सीमित आर्थिक प्रतिनिधित्व का मतलब है कि इन टेक शेयरों में गिरावट इमर्जिंग मार्केट्स में कहीं और आई मजबूती को छिपा सकती है, जिससे निवेशकों को गुमराह कर सकती है। इंडेक्स के ज्यादातर वैल्यू के लिए कुछ कंपनियों पर निर्भर रहना तेज और अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव की संभावना को भी बढ़ाता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.