दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक (Geopolitical) अनिश्चितता बढ़ गई है। बांग्लादेश के भारत के साथ बदलते कूटनीतिक रुख और पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी के कारण क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर है।
दक्षिण एशिया में इस हफ्ते राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर काफी हलचल देखी गई है। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में संघीय सरकार ने इमरजेंसी और गवर्नर शासन लागू कर दिया है। वहां के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी सहित कई नेताओं की गिरफ्तारी के बाद हालात तनावपूर्ण हैं और मामला अब पेशावर हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है।\n\nदूसरी ओर, भारत और बांग्लादेश के बीच के कूटनीतिक संबंधों में भी बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। नई दिल्ली में आयोजित पहले BIMSTEC होम मिनिस्टर्स की मीटिंग से बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद का नदारद रहना विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय है। वहीं, बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, जहां 33,000 स्थानों पर ड्रोन और हेलीकॉप्टर तैनात किए जा रहे हैं।\n\nश्रीलंका की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है, जहां राजनीतिक और स्वास्थ्य संबंधी संकटों के कारण आर्थिक सुधार की राह कठिन दिख रही है। हालांकि, इन तमाम भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत के लिए राहत की बात यह है कि यूके (UK) के साथ £1 बिलियन का नया ट्रेड एग्रीमेंट साइन हुआ है, जो भारत की विकास यात्रा को गति दे रहा है। इसके अलावा, अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार रॉबर्ट ई. हॉल और माइकल वुडफोर्ड को दिया गया है, जिनके मॉडल केंद्रीय बैंकों को मार्केट वोलैटिलिटी संभालने में मदद करते हैं। निवेशकों को अब क्षेत्रीय व्यापार और करेंसी स्टेबिलिटी पर नजर रखने की जरूरत है।
