ईरान की KEVER Shipping कंपनी के जहाज पर सवार 6 भारतीय नाविक कराची पोर्ट पर पिछले 7 महीनों से फंसे हुए हैं। एक कमर्शियल विवाद के कारण इन नाविकों को बंधक जैसी स्थिति में रहना पड़ रहा है, जिसके बाद अब इनके परिवारों ने भारत सरकार से कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
यह संकट तब शुरू हुआ जब ईरान स्थित KEVER Shipping Company का जहाज कराची पोर्ट पर फंस गया। अप्रैल 2026 से यह जहाज वहीं खड़ा है। असल में, शिप के मालिक और पोर्ट अथॉरिटीज के बीच एक कमर्शियल झगड़ा चल रहा है, जिसका खामियाजा इन 6 भारतीय नाविकों को भुगतना पड़ रहा है। इन्हें न तो बाहर निकलने दिया जा रहा है और न ही इनके पास यात्रा के दस्तावेज सुरक्षित हैं।
लॉजिस्टिक और ऑपरेशनल रिस्क
शिपिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर नजर रखने वाले इन्वेस्टर्स के लिए यह घटना एक बड़े रिस्क की तरह है। जब भी थर्ड-पार्टी शिपिंग फर्म्स ऐसे कानूनी विवादों में फंसती हैं, तो उसका असर सीधे तौर पर काम और स्टाफ की सुरक्षा पर पड़ता है। इस जहाज पर बिजली कटौती और सीमित आवाजाही जैसी गंभीर समस्याएं भी सामने आई हैं।
सरकार से कूटनीतिक मदद की अपील
चीफ ऑफिसर विनीत किशोर मिश्रा समेत फंसे हुए अन्य क्रू मेंबर्स की स्थिति नाजुक बनी हुई है। उनके परिवारों ने Ministry of External Affairs से मदद की गुहार लगाई है। निवेशकों के लिए यह केस इसलिए अहम है क्योंकि यह क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड में होने वाली जियो-पॉलिटिकल और कमर्शियल घर्षण (friction) को दर्शाता है, जो ग्लोबल सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है।
