ग्लोबल फैशन दिग्गज Shein ने वियतनाम में अपने गोदामों का आकार आधा कर दिया है। अमेरिका की 'डी मिनिमिस' ड्यूटी छूट खत्म होने के बाद, कंपनी को लागत बढ़ने और $99 मिलियन (लगभग ₹825 करोड़) के तिमाही नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
Shein का बड़ा कदम: वियतनाम से समेट रही पैर!
फैशन रिटेलर Shein ने वियतनाम में अपने ऑपरेशन्स को काफी कम कर दिया है। पहले जो कंपनी 15 हेक्टेयर में गोदाम चला रही थी, अब उसे घटाकर सिर्फ 6 हेक्टेयर कर दिया गया है। यह फैसला चीन से मैन्युफैक्चरिंग को हटाने और सप्लाई चेन को डायवर्सिफाई करने की उसकी पुरानी योजनाओं से एक बड़ा यू-टर्न माना जा रहा है।
अमेरिका की नई पॉलिसी बनी वजह
इस कटौती का मुख्य कारण अमेरिका सरकार का 2025 में लिया गया वो फैसला है, जिसने $800 से कम मूल्य वाले छोटे पार्सल पर मिलने वाली 'डी मिनिमिस' ड्यूटी छूट को खत्म कर दिया। सालों से Shein जैसी कंपनियां इस छूट का फायदा उठाकर अमेरिका में बिना इंपोर्ट ड्यूटी के सस्ते सामान बेच रही थीं। इस छूट के हटने से वियतनाम जैसे देशों से एक्सपोर्ट हब चलाने का लागत-फायदा काफी कम हो गया है।
वित्तीय नतीजों पर भी पड़ा असर
ट्रेड पॉलिसी में इस बड़े बदलाव का असर Shein के हालिया वित्तीय नतीजों पर भी साफ दिख रहा है। कंपनी को 2026 की पहली तिमाही में $99 मिलियन (लगभग ₹825 करोड़) का नेट लॉस (Net Loss) हुआ है। यह 2025 की इसी अवधि में हुए $395 मिलियन (लगभग ₹3285 करोड़) के मुनाफे के बिल्कुल विपरीत है। इन टैक्स छूटों के खत्म होने और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत ने कंपनी के मुनाफे पर भारी दबाव डाला है।
वियतनाम में ऑपरेशनल दिक्कतें
ट्रेड पॉलिसी के अलावा, Shein को वियतनाम में अपने ऑपरेशन्स को बढ़ाने में भी कई प्रैक्टिकल दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कंपनी का बिजनेस मॉडल चीन के सप्लायर्स पर आधारित है, जो बहुत कम समय में छोटे बैचों में सामान बना सकते हैं। वियतनाम में इसी स्पीड और लागत-एफिशिएंसी को दोहराना लेबर की कमी और मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के अंतर के कारण मुश्किल साबित हुआ है। कई सप्लायर्स जो शुरू में डायवर्सिफिकेशन के लिए वियतनाम गए थे, अब वापस चीन लौट रहे हैं क्योंकि वहां का इकोसिस्टम Shein की तेज प्रोडक्शन साइकिल को बेहतर सपोर्ट करता है।
आगे का रास्ता और रिस्क
चीन में वापस कंसॉलिडेट (Consolidate) होने में भी रिस्क है। Shein अभी भी अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड टेंशन के प्रति काफी संवेदनशील है, और चीनी सामानों पर कोई भी अतिरिक्त टैरिफ उसकी प्रॉफिटेबिलिटी को और नुकसान पहुंचा सकता है। साथ ही, दुनिया भर के रेगुलेटर्स (Regulators) ई-कॉमर्स इम्पोर्ट्स पर कड़ी नज़र रख रहे हैं, और यूरोपीय यूनियन में भी इंपोर्ट ड्यूटी को लेकर चर्चाएं चल रही हैं।
निवेशकों के लिए, मुख्य सवाल यह है कि Shein इन बढ़ती ऑपरेशनल लागतों और ट्रेड रिस्क को कैसे मैनेज करती है, खासकर जब वह संभावित IPO (Initial Public Offering) की ओर बढ़ रही है। कंपनी भले ही चीन में अपनी सप्लाई चेन को बेहतर बनाने के लिए री-इन्वेस्ट कर रही हो, लेकिन कड़ी इंटरनेशनल ट्रेड एनवायरनमेंट में अपनी लो-प्राइस स्ट्रैटेजी को बनाए रखने की उसकी क्षमता अगले कुछ तिमाहियों में मॉनिटर करने वाला सबसे अहम फैक्टर रहेगी।
