तिब्बत के Gyirong क्षेत्र में **26 अगस्त, 2026** को आई भीषण बाढ़ के बाद Isha Foundation से जुड़े **77** अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्री लापता हैं। चीन-नेपाल सीमा पर हुए इस हादसे के कारण संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप है, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ी चुनौती आ रही है।
राहत और बचाव कार्यों की स्थिति
चीन-नेपाल सीमा के पास स्थित Gyirong क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ को बीते 48 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है। जानकारी के मुताबिक, आपदा के समय तीर्थयात्री इमिग्रेशन ऑफिस में मौजूद थे, जो बाढ़ की चपेट में आ गया। रेस्क्यू टीमें मलबे और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के बीच लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं।
कौन-कौन से देश शामिल?
लापता समूह बेहद विविध है, जिसमें अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूनाइटेड किंगडम समेत 19 देशों के नागरिक शामिल हैं। पावर और टेलीकम्युनिकेशन लाइनें बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण इलाके का संपर्क शेष दुनिया से टूट गया है, जिससे रेस्क्यू टीमों को जमीनी स्तर पर समन्वय करने में भारी कठिनाई हो रही है।
कूटनीतिक और प्रशासनिक कोशिशें
Isha Foundation के समन्वयक भारत, चीन और नेपाल के राजनयिक मिशनों के साथ तालमेल बिठाकर काम कर रहे हैं। हालांकि, शुक्रवार, 28 अगस्त, 2026 तक तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को लेकर कोई पुष्टि नहीं हो पाई है। खबरों के अनुसार, सद्गुरु (जग्गी वासुदेव) ने खुद आपदा स्थल पर जाने की कोशिश की थी, लेकिन खराब रास्तों और सुरक्षा प्रतिबंधों के चलते उन्हें अनुमति नहीं मिल सकी।
बड़े पैमाने पर तबाही
यह फ्लैश फ्लड एक बड़ी मौसमी आपदा का हिस्सा है, जिसने पूरे क्षेत्र में तबाही मचा रखी है। रिपोर्टों के अनुसार, इस पूरे इलाके में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 1,000 लोग अभी भी लापता हैं। दुर्गम इलाका और अस्थिर मलबे के कारण बचाव दलों का पहुंचना नामुमकिन सा हो गया है।
फिलहाल इस पूरी घटना का कोई भी सीधा प्रभाव शेयर बाजार पर नहीं है क्योंकि Isha Foundation एक गैर-लाभकारी संगठन है। फिलहाल निवेशकों और आम लोगों को Ministry of External Affairs की आधिकारिक अपडेट्स पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
