हूती (Houthi) विद्रोहियों के लगातार हमलों से परेशान सऊदी अरब अब इजरायल की मदद लेने की तैयारी में है। खबरों के मुताबिक, अमेरिका के जरिए सऊदी अरब इजरायल से इंटेलिजेंस सपोर्ट मांग रहा है ताकि 'बाब अल-मंडेब' जलडमरूमध्य (strait) और जरूरी एनर्जी रूट को सुरक्षित रखा जा सके।
सऊदी अरब की यह पहल क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की एक बड़ी कोशिश है। यह पूरा तालमेल अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के जरिए हो रहा है, क्योंकि सऊदी और इजरायल के बीच कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। यह कदम तब उठाया गया है जब पाकिस्तान ने यमन में सैन्य मदद देने से इनकार कर दिया है और अमेरिका-यूके का रुख फिलहाल केवल सलाह देने तक सीमित है।
ग्लोबल मार्केट पर असर
बाब अल-मंडेब का इलाका ग्लोबल शिपिंग और एनर्जी सप्लाई के लिए बेहद अहम है। हूती विद्रोहियों द्वारा तेल पाइपलाइनों को दी जा रही धमकियों से शिपिंग इंश्योरेंस प्रीमियम और लॉजिस्टिक लागत बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
भारतीय निवेशकों के लिए रिस्क
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ला सकता है, जिसका सीधा असर भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) जैसे Indian Oil Corporation (IOC), Bharat Petroleum (BPCL) और Hindustan Petroleum (HPCL) के मार्जिन पर पड़ता है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो इन कंपनियों के लिए प्रॉफिट बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
निवेशकों को सलाह है कि वे रेड सी में सुरक्षा हालात पर नजर रखें, क्योंकि इस क्षेत्र में कोई भी तनाव ग्लोबल सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।
