BRICS समिट से पहले रूस ने यूक्रेन विवाद पर भारत की मध्यस्थता का समर्थन किया है। नई दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली बैठक में रक्षा, ऊर्जा और अमेरिकी टैरिफ जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
क्रेमलिन ने औपचारिक रूप से यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए भारत के प्रयासों पर सहमति व्यक्त की है। यह राजनयिक बदलाव 11 से 13 सितंबर, 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले 18वें BRICS समिट से ठीक पहले आया है। समिट का सबसे मुख्य आकर्षण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी, जिसमें दोनों नेता रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर देंगे।
ऊर्जा और रक्षा सहयोग का विस्तार
राजनयिक बातचीत के अलावा, इस समिट में कई बड़े कमर्शियल और इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स पर चर्चा होने वाली है। भारत में नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण को लेकर बातचीत एजेंडे में सबसे ऊपर है। इसके अलावा, Su-57 फाइटर एयरक्राफ्ट की खरीद को लेकर भी चर्चा की संभावना है। भारतीय डिफेंस और एनर्जी सेक्टर के लिए ये घटनाक्रम रूसी तकनीक पर निरंतर निर्भरता को दर्शाते हैं। यदि इन प्रोजेक्ट्स पर काम आगे बढ़ता है, तो यह भारत के डिफेंस आधुनिकीकरण और ऊर्जा क्षमता के लिए लॉन्ग-टर्म स्थिरता प्रदान करेगा, हालांकि प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन पर निवेशकों की नजर रहेगी।
आर्थिक और प्रतिबंधों के जोखिम
साझेदारी गहराने के साथ-साथ यह बाहरी आर्थिक दबावों का भी सामना कर रही है। अमेरिका द्वारा रूसी क्रूड ऑयल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की संभावना भारत की ऊर्जा रणनीति के लिए एक बड़ा जोखिम है। हालांकि, यह विधायी प्रस्ताव फिलहाल अमेरिकी हाउस में विरोध का सामना कर रहा है, लेकिन यह सीमा-पार व्यापार के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। यदि यह कानून लागू होता है, तो भारत के लिए ऊर्जा आयात महंगा हो सकता है, जिससे घरेलू महंगाई पर असर पड़ सकता है।
इन जोखिमों को कम करने के लिए, दोनों देशों ने अमेरिकी डॉलर के बजाय अपनी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने पर जोर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस और BRICS सदस्य देशों के बीच लगभग 90% लेनदेन अब स्थानीय मुद्राओं में हो रहे हैं। निवेशकों के लिए इस द्विपक्षीय बैठक का परिणाम बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह तय करेगा कि दोनों देश अपने व्यापार गलियारे को वैश्विक प्रतिबंधों से कैसे सुरक्षित रखेंगे।
