रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। यूक्रेन ने जवाबी कार्रवाई में रूस की ऑयल फैसिलिटी और भारत आ रहे एक ऑयल टैंकर को निशाना बनाया है, जिससे क्रूड ऑयल की सप्लाई चेन पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
जंग का बढ़ा दायरा और एनर्जी पर असर
7 अक्टूबर 2026 को रूस ने यूक्रेन के कीव समेत 12 से ज्यादा क्षेत्रों पर लगभग 70 मिसाइल और ड्रोन्स से भीषण हमला किया, जिसमें 19 लोगों की मौत हो गई। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने इस हमले के बाद पेट्रियोट (Patriot) डिफेंस सिस्टम की तत्काल जरूरत पर जोर दिया है।
भारत के लिए चिंता की बात
जवाब में यूक्रेनी सेना ने रूस के पर्म, समारा और अस्त्रखान इलाकों में स्थित एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर ड्रोन हमले किए। सबसे गंभीर घटना सोची के पास हुई, जहां यूक्रेन के समुद्री ड्रोन ने एक ऐसे ऑयल टैंकर को निशाना बनाया, जो कथित तौर पर भारत के लिए कच्चा तेल ले जा रहा था।
पिछले 2 सालों से भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूसी कच्चे तेल पर काफी निर्भर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्लैक सी (Black Sea) में शिपिंग रूट बाधित होते हैं, तो न केवल क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आएगा, बल्कि जहाजों का इंश्योरेंस और फ्रेट कॉस्ट (War Risk Premium) भी बढ़ जाएगा।
निवेशकों के लिए सलाह
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशकों को अब ग्लोबल ब्रेंट और यूराल (Urals) क्रूड की कीमतों पर पैनी नजर रखनी होगी। हालांकि भारत की तरफ तेल की सप्लाई अब तक बनी रही है, लेकिन समुद्री रास्तों पर बढ़ते हमलों ने लॉजिस्टिकल रिस्क को काफी बढ़ा दिया है। युद्ध के कारण एनर्जी सेक्टर में बनी यह वोलेटिलिटी आने वाले समय में पोर्टफोलियो पर असर डाल सकती है।
