रूस ने स्विस कंपनी Nestle और फ्रांसीसी रिटेलर Auchan की स्थानीय यूनिट्स को अस्थायी सरकारी प्रशासन के अधीन कर दिया है। 'अनफ्रेंडली' देशों के खिलाफ अपनी जवाबी नीति के तहत रूस का यह बड़ा कदम विदेशी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
रूसी सरकार का कड़ा कदम
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने Nestle और Auchan की रूसी सब्सिडियरीज को स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन (State Administration) के दायरे में लाने का फरमान जारी किया है। सिर्फ यही नहीं, इस लिस्ट में लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर FM Logistic और रिटेलर Lemana Pro को भी शामिल किया गया है। अब इन सभी कंपनियों की बागडोर 'LEV Management' के हाथों में होगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
रूस का मानना है कि जो देश उसे 'अनफ्रेंडली' (Unfriendly) की श्रेणी में रखते हैं, उनके खिलाफ यह जवाबी कार्रवाई है। साल 2023 में रूस ने एक कानून पारित किया था, जिसके तहत विदेशी संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाना अब आसान हो गया है। इससे पहले Danone और Carlsberg जैसी बड़ी कंपनियां भी इसी तरह के सरकारी टेकओवर का शिकार हो चुकी हैं, जिन्हें बाद में काफी डिस्काउंट पर स्थानीय खरीदारों को बेच दिया गया था।
निवेशकों के लिए क्या है जोखिम?
ग्लोबल स्तर पर निवेशकों के लिए यह घटना 'एसेट सेफ्टी' (Asset Safety) को लेकर बड़े सवाल खड़े करती है। जब कोई कंपनी सरकारी नियंत्रण में जाती है, तो उसके वापस मिलने की उम्मीद न के बराबर रह जाती है। इसका सीधा असर इन मल्टीनेशनल कंपनियों की बैलेंस शीट पर पड़ता है, क्योंकि उन्हें अपने एसेट्स की वैल्यू को 'राइट-डाउन' (Write-down) करना पड़ सकता है, जिसका असर ग्लोबल अर्निंग्स पर भी दिखेगा।
भारतीय निवेशकों के लिए यह स्थिति समझने वाली है। हालांकि Nestle India एक अलग इकाई है, लेकिन ग्लोबल पैरेंट कंपनी पर आने वाली किसी भी भू-राजनीतिक (Geopolitical) आंच का असर सेंटीमेंट्स और वैल्यूएशन पर पड़ सकता है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि ये कंपनियां इस मैनेजमेंट ट्रांसफर के जवाब में क्या कदम उठाती हैं और क्या भविष्य में अन्य सेक्टरों पर भी इसकी गाज गिरेगी?
