हूती विद्रोहियों ने यमन के अहम मोखा बंदरगाह पर कब्जा कर लिया है, जो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग 'बाब अल-मंदेब' से महज **80** किलोमीटर दूर है। इस खबर के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया है और इसके **$108** प्रति बैरल के स्तर तक पहुंचने से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता बढ़ गई है।
लाल सागर में तनाव एक बार फिर गहरा गया है। 10 सितंबर 2026 को हूती विद्रोहियों ने मोखा के रणनीतिक बंदरगाह पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। यह इलाका बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बेहद करीब है, जहां से दुनिया का 12% ट्रेड गुजरता है। इस घटना के बाद से ग्लोबल शिपिंग और एनर्जी सप्लाई चेन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
क्रूड ऑयल और बाजार पर असर
इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल का सीधा असर एनर्जी मार्केट पर दिखा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $108 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रही हैं। यदि यह रास्ता लंबे समय तक बाधित रहता है, तो शिपिंग कंपनियों को लंबे रूट अपनाने पड़ेंगे, जिससे फ्यूल की खपत बढ़ेगी और कार्गो इंश्योरेंस प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी होगी।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं रिस्क?
भारत के लिए यह खबर काफी संवेदनशील है, क्योंकि हम अपनी जरूरतों के लिए क्रूड ऑयल के आयात पर भारी निर्भर हैं।
- महंगाई का खतरा: अगर तेल की कीमतें ऐसे ही बढ़ती रहीं, तो देश के इंपोर्ट बिल पर दबाव बढ़ेगा और घरेलू स्तर पर महंगाई में इजाफा हो सकता है।
- प्रॉफिट मार्जिन: मैन्युफैक्चरिंग, केमिकल और रिटेल जैसे सेक्टर्स, जो ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर हैं, उनके फ्रेट कॉस्ट बढ़ने से मार्जिन पर असर पड़ने की आशंका है।
फिलहाल ईरान और सऊदी अरब के बीच डिप्लोमैटिक हलचल पर सबकी नजरें टिकी हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में क्रूड ऑयल की चाल और समुद्री रास्तों की सुरक्षा ही तय करेगी कि यह संकट कितना बड़ा रूप लेता है।
