भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंध और मजबूत हुए हैं, क्योंकि भारतीय कंपनियों ने 2026 SelectUSA Summit में अमेरिका में $20.5 अरब का रिकॉर्ड निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। यह घोषणा भारत की बढ़ती ग्लोबल निवेश क्षमता को दर्शाती है, लेकिन यह मुख्य रूप से फार्मास्यूटिकल सेक्टर के सौदों पर केंद्रित है।
फार्मा सेक्टर का दबदबा
इस भारी-भरकम निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा $19.1 अरब से अधिक फार्मा सेक्टर से आया है। इसमें सबसे प्रमुख है Sun Pharmaceutical Industries का अमेरिकी कंपनी Organon & Co. के साथ $11.75 अरब का अधिग्रहण। इस बड़े कदम का मकसद Sun Pharma को दुनिया की टॉप 25 फार्मा कंपनियों में शामिल करना और $12.4 अरब के रेवेन्यू का लक्ष्य हासिल करना है। यह डील अमेरिकी जेनेरिक बाज़ार की चुनौतियों का सामना करने और अपने इनोवेटिव मेडिसिन बिज़नेस को मजबूत करने के लिए की जा रही है। $11.75 अरब की यह डील रेगुलेटरी अप्रूवल मिलने के बाद 2027 की शुरुआत तक पूरी होने की उम्मीद है।
फार्मा सेक्टर में Zydus Lifesciences भी पीछे नहीं है, इसने अपने स्पेशियलिटी और ऑन्कोलॉजी बिज़नेस को बढ़ाने के लिए अमेरिका की Assertio Holdings को $166.4 मिलियन में खरीदा है। वहीं, Jubilant Pharmova ने 2028 तक अमेरिका में अपनी स्टराइल इंजेक्टेबल क्षमता को दोगुना करने के लिए $300 मिलियन निवेश करने की योजना बनाई है।
अन्य सेक्टरों में मिला-जुला असर
फार्मा के बाहर भी निवेश हो रहे हैं, लेकिन नतीजे मिले-जुले हैं। JSW Steel, ओहियो और टेक्सास में अपने प्लांट्स के आधुनिकीकरण के लिए $255 मिलियन का निवेश करेगी। हालांकि, कंपनी को बढ़ती मटेरियल कॉस्ट, कड़ी प्रतिस्पर्धा और एंटीट्रस्ट जांच का सामना करना पड़ रहा है। Sterlite Technologies (STL) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए डेटा सेंटरों के लिए एडवांस्ड ऑप्टिकल फाइबर सप्लाई करने की तैयारी में है।
ट्रेड डील्स और ग्लोबल रिस्क
यह बड़ा भारतीय निवेश ऐसे समय आया है जब भारत-अमेरिका का व्यापारिक संबंध एक नए मोड़ पर है। पिछले साल अगस्त 2025 में अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए 50% तक के टैरिफ के बाद व्यापार में गिरावट आई थी। हालांकि, 7 फरवरी 2026 से प्रभावी एक नए समझौते ने भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया है। इससे विशेष रूप से टेक्सटाइल, फार्मा और केमिकल्स जैसे सेक्टरों में भारत की एक्सपोर्ट कम्पेटिटिवनेस बहाल हुई है।
निवेश के जोखिम
इन रिकॉर्ड निवेशों के बावजूद, कई जोखिम बने हुए हैं। Sun Pharma का अधिग्रहण कंपनी पर काफी कर्ज़ बढ़ाएगा, जिसकी वजह से क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां इसकी टॉप 'AAA' रेटिंग की समीक्षा कर रही हैं। भारतीय दवा कंपनियों को अमेरिका में कीमतों के दबाव और FDA की निगरानी का भी सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, सेमीकंडक्टर और क्लीन एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों में ग्रोथ अमेरिकी सरकारी इंसेंटिव और पॉलिसी की निश्चितता पर निर्भर करती है, जो विदेशी निवेशकों के लिए रेगुलेटरी रिस्क पैदा करती है। चीन की क्लीन एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग में मजबूत पकड़ भी एक बड़ी प्रतिस्पर्धात्मक चुनौती है। कुल मिलाकर, यह रिकॉर्ड निवेश भारतीय फर्मों की वैश्विक स्तर पर विस्तार करने की रणनीतिक कोशिश को दिखाता है, लेकिन भविष्य की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे वैश्विक जटिलताओं को कैसे संभालती हैं और अमेरिकी व्यापार व औद्योगिक नीतियों के साथ कैसे तालमेल बिठाती हैं।