रक्षा मंत्री Rajnath Singh 19 अक्टूबर को दुशांबे में SCO (Shanghai Cooperation Organisation) की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस समिट में रीजनल कनेक्टिविटी, ट्रेड और डिजिटल इनोवेशन पर फोकस है, जो सेंट्रल एशिया में व्यापार करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए काफी अहम साबित हो सकता है।
रक्षा मंत्री Rajnath Singh दुशांबे में आयोजित होने वाली Shanghai Cooperation Organisation (SCO) की 'काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट' बैठक के लिए पहुंच रहे हैं। 19 अक्टूबर से शुरू होने वाली इस दो दिवसीय समिट में दस सदस्य देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे और रीजनल इकोनॉमिक ग्रोथ, ट्रेड कनेक्टिविटी और डिजिटल इंटीग्रेशन पर चर्चा करेंगे। हालांकि यह मंच मुख्य रूप से कूटनीतिक है, लेकिन इसके आर्थिक एजेंडे के दूरगामी प्रभाव भारतीय कंपनियों पर पड़ सकते हैं।
एक्सपोर्टर्स के लिए मायने
समिट का मुख्य फोकस रीजनल लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाना है। यह खबर टेक्सटाइल्स, फार्मास्यूटिकल्स और इंजीनियरिंग जैसे एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर की कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है। भारत लंबे समय से International North-South Transport Corridor (INSTC) जैसे मार्गों को विकसित करने पर जोर दे रहा है। यदि इस बैठक में सीमा पार व्यापार और कस्टम प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर कोई ठोस समझौता होता है, तो भारतीय व्यवसायों की ट्रांजैक्शन कॉस्ट में कमी आ सकती है और बिजनेस की सुगमता बढ़ सकती है।
डिजिटल और फाइनेंशियल आधुनिकीकरण
बैठक में डिजिटल फ्रेमवर्क के तालमेल पर भी बात होगी, जिससे क्षेत्रीय व्यापार में होने वाली कागजी प्रक्रियाओं की जटिलता कम हो सकती है। टेक-इनेबल्ड सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए यह एक बड़ा अवसर हो सकता है क्योंकि इससे रीजनल सप्लाई चेन में एंट्री की बाधाएं कम होने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को यह समझना होगा कि सेंट्रल एशिया में बुनियादी ढांचे की कमी एक बड़ी चुनौती है। SCO के सदस्य देशों की आर्थिक प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं, इसलिए किसी भी ठोस नतीजे तक पहुंचना एक लंबी प्रक्रिया है। निवेशकों को सलाह है कि वे केवल कूटनीतिक घोषणाओं के बजाय कस्टम फैसिलिटेशन या इन्फ्रास्ट्रक्चर फंडिंग से जुड़े ठोस समझौतों (Protocols) पर नजर रखें, क्योंकि यही आगे चलकर भारतीय कंपनियों के लिए मुनाफे का रास्ता साफ करेंगे।
