अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) एक बड़े विवाद में फंस गया है। हाल ही में, Pentagon ने अपने एक रिपोर्ट में अमेरिकी सैनिकों की हताहतों की संख्या में **4** की कमी कर दी, जिससे पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब ईरान में चल रहे सैन्य अभियानों और सैनिकों के नुकसान को लेकर प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है।
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Pentagon ने दी सफाई, फिर भी उठे सवाल
Pentagon के अधिकारियों का कहना है कि यह आंकड़ा संशोधन एक 'अस्थायी डेटा व्यवधान' के कारण हुआ था। Pentagon के मुख्य प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में इस बात की पुष्टि की है कि विभाग तकनीकी विसंगतियों की जांच कर रहा है। हालांकि, इस स्पष्टीकरण के बावजूद, यह मामला इसलिए गंभीर हो गया है क्योंकि जिन सैनिकों को गिनती से हटाया गया था, वे हाल ही में डोवर एयर फोर्स बेस में एक सम्मान समारोह में शामिल थे।
पारदर्शिता की मांग तेज
इस डेटा में गड़बड़ी के बाद, 12 डेमोक्रेटिक सीनेटरों के एक समूह ने रक्षा सचिव पीट हेगसेथ को एक औपचारिक पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने हताहतों के आंकड़ों को लेकर एक व्यापक ऑडिट और स्पष्ट जानकारी की मांग की है। सांसदों को चिंता है कि मौजूदा रिपोर्टिंग प्रणाली जनता और कांग्रेस को आवश्यक पारदर्शिता प्रदान नहीं कर रही है। पूर्व अधिकारियों, जिनमें पूर्व विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस और पूर्व CIA प्रमुख लियोन पनेटा शामिल हैं, ने भी इस 'तकनीकी गड़बड़ी' वाले स्पष्टीकरण पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि पारदर्शिता की कमी लोकतांत्रिक जवाबदेही के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।
ऑपरेशनल पारदर्शिता और सामरिक निरीक्षण
हताहतों की संख्या को लेकर यह विवाद इस बात पर भी चिंताएं बढ़ा रहा है कि ईरान में चल रहे संघर्ष को कैसे वर्गीकृत किया जा रहा है। हालांकि प्रशासन ने पहले घोषणा की थी कि 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' नामक ऑपरेशन मई में समाप्त हो गया था, लेकिन सैन्य हमले व्यापक 'विदेशी अभियानों' के तहत जारी हैं। इस शब्दावली में बदलाव के कारण कुछ सांसदों का तर्क है कि प्रशासन कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी के बिना सैन्य कार्रवाइयों के लिए 60-दिवसीय संवैधानिक अधिसूचना आवश्यकता को दरकिनार करने की कोशिश कर रहा हो सकता है।
जैसे-जैसे मध्यावधि चुनाव नजदीक आ रहे हैं, इस मुद्दे पर राजनीतिक ध्यान तेज हो रहा है। इस क्षेत्र में चल रही सैन्य गतिविधि को घरेलू आर्थिक चिंताओं से जोड़ा जा रहा है, जिसमें गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव और जीवन-यापन की लागत में वृद्धि शामिल है। निवेशक और जनता अब इस बात पर नजर रख रही हैं कि क्या रक्षा विभाग इन डेटा चिंताओं को दूर करने के लिए एक अधिक विस्तृत सार्वजनिक रिपोर्ट प्रदान करेगा, क्योंकि सैन्य प्रतिबद्धताओं के बारे में पारदर्शिता अक्सर व्यापक राजनीतिक स्थिरता और वित्तीय योजना को प्रभावित करती है।
