पाकिस्तान का विदेशी कर्ज (External Debt) बढ़कर **$135.1 बिलियन** के स्तर पर पहुंच गया है। पिछले एक दशक में यह आंकड़ा लगभग दोगुना हो गया है, जिसमें चीन सबसे बड़ा द्विपक्षीय कर्जदाता बना हुआ है।
साल 2015 में पाकिस्तान का विदेशी कर्ज $68.67 बिलियन था, जो अब 97% बढ़कर $135.1 बिलियन हो गया है। इस भारी भरकम कर्ज में $107.07 बिलियन का हिस्सा पब्लिक और पब्लिकली गारंटीड डेट का है।\n\n### कर्ज का जाल और चीन की भूमिका\n\nपाकिस्तान के बैलेंस शीट पर चीन का प्रभाव सबसे ज्यादा है, जिसके पास $22.42 बिलियन का बकाया लोन है। हालांकि, वर्ल्ड बैंक ($19.21 बिलियन) और एशियन डेवलपमेंट बैंक ($16.83 बिलियन) जैसे बहुपक्षीय संस्थान भी बड़े कर्जदाता हैं, लेकिन चीन की स्थिति ज्यादा निर्णायक बनी हुई है।\n\n### उधारी की महंगी कीमत\n\nदेश के खजाने पर कर्ज का दबाव इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि सरकारी लोन की तुलना में प्राइवेट कर्ज बेहद महंगा है। आधिकारिक संस्थानों का औसत ब्याज दर 3.6% है और इसका भुगतान 16 साल में करना है, जबकि प्राइवेट क्रेडिटर्स 8.6% की ऊंची दर पर लोन दे रहे हैं जिसे केवल 3 साल में चुकाना है। यह कम समय सीमा विदेशी मुद्रा भंडार पर तुरंत दबाव बनाती है।\n\n### राहत और मौजूदा स्थिति\n\nलिक्विडिटी बनाए रखने के लिए बीजिंग ने हाल ही में $2 बिलियन के लोन की मैच्योरिटी बढ़ा दी है, वहीं इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने अपनी एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी के जरिए $2.3 बिलियन का डिस्बर्समेंट किया है। इन राहतों के बावजूद, देश की वित्तीय स्थिरता पूरी तरह से विदेशी कर्ज पर निर्भर है।
