साल 2019 से भारत के साथ व्यापार पर लगी रोक ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी है। पाक-इंडिया बिजनेस काउंसिल के मुताबिक, देश को अब तक **$40 अरब** का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। प्रतिबंध के बावजूद, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत से **$6.17 करोड़** का इंपोर्ट दर्ज किया गया है।
नुकसान का असली कारण
पाक-इंडिया बिजनेस काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2019 में व्यापार बंद होने के बाद से पाकिस्तान को $40 अरब का नुकसान हुआ है। इसकी बड़ी वजह है जरूरी सामानों को भारत की जगह दूर-दराज के देशों से मंगाना, जिससे लॉजिस्टिक कॉस्ट कई गुना बढ़ गई है।
इनडायरेक्ट ट्रेड का सच
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के डेटा से पता चलता है कि आधिकारिक बैन के बावजूद सामान अब भी भारत से आ रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत से $6.17 करोड़ का सामान इंपोर्ट किया गया, जो पिछले साल के मुकाबले 68.9% ज्यादा है। यह व्यापार अब दुबई, सिंगापुर और कोलंबो जैसे देशों के जरिए घुमाकर किया जा रहा है, जिससे व्यापारियों को भारी प्रीमियम चुकाना पड़ रहा है।
उद्योग जगत पर असर
पाकिस्तान के टेक्सटाइल और फार्मा सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। कॉटन की कमी होने पर अब मैन्युफैक्चरर्स को ब्राजील और मिस्र जैसे देशों का रुख करना पड़ रहा है, जो बहुत महंगा साबित हो रहा है। इसी तरह फार्मा कंपनियां भी सस्ती दवाओं के कच्चे माल के लिए तरस रही हैं, जिससे घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ गई है।
मैक्रो इकोनॉमिक दबाव
वित्त वर्ष 2026 में पाकिस्तान का कुल ट्रेड डेफिसिट $39.5 अरब पहुंच गया है। चीनी, खाद और पेट्रोल जैसे सामानों को लंबी समुद्री यात्रा के जरिए मंगाने से न केवल विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) पर असर पड़ रहा है, बल्कि आम जनता भी महंगाई की मार झेल रही है। फिलहाल वहां के कई उद्योग समूह भारत के साथ सीधे व्यापार बहाल करने की मांग कर रहे हैं ताकि बढ़ती लागत को कम किया जा सके।
