पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif लंदन में Rothschild & Co समेत कई दिग्गज ग्लोबल बैंकों के प्रतिनिधियों से मिले। इकोनॉमिक स्ट्रैटेजी और विदेशी निवेश पर चर्चा के बाद देश में राजनीतिक विरोध शुरू हो गया है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और वित्त मंत्री Muhammad Aurangzeb की लंदन यात्रा ने देश की सियासत में भूचाल ला दिया है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य आर्थिक सुधारों पर चर्चा करना और विदेशी पूंजी को आकर्षित करना था, लेकिन Rothschild & Co के साथ हुई मीटिंग ने एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।
क्यों हो रहा है बवाल?
पाकिस्तान की विपक्षी पार्टी Pakistan Tehreek-e-Insaf (PTI) ने इस मीटिंग को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। देश में इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं होने और क्षेत्रीय संघर्षों को लेकर जनभावनाएं बेहद संवेदनशील हैं, ऐसे में Rothschild & Co के साथ मुलाकात को विपक्ष ने एक बड़े मुद्दे के रूप में पेश किया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार अपनी विदेश नीति के खिलाफ काम कर रही है।
इकोनॉमिक एजेंडा और ग्लोबल बैंक
विपक्ष के हमलों के बावजूद, सरकार अपनी आर्थिक रणनीति पर कायम है। इस डेलिगेशन ने Barclays, JPMorgan, Citi और BlackRock जैसे बड़े संस्थानों के साथ बैठक की। इन बैठकों का मकसद 'कैपिटल मार्केट डेवलपमेंट' और लंबी अवधि की आर्थिक योजना के लिए सलाह लेना था, ताकि देश की डगमगाती इकोनॉमी को संभाला जा सके।
भविष्य के लिए रिस्क
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि पाकिस्तान के लिए अपनी इकोनॉमी को स्थिर करने हेतु विदेशी निवेश बेहद जरूरी है, लेकिन वहां की घरेलू राजनीति इन प्रयासों की राह में सबसे बड़ी बाधा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या सरकार इन मुलाकातों से ठोस विदेशी निवेश (Capital Inflow) जुटा पाती है, या राजनीतिक दबाव के चलते प्रस्तावित आर्थिक सुधार ठंडे बस्ते में चले जाएंगे।
