पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने Gilgit-Baltistan में एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया है। ये प्रोजेक्ट्स China-Pakistan Economic Corridor का हिस्सा हैं, जिस पर भारत ने अपनी कड़ी आपत्ति जताई है।
काम में तेजी लाने का निर्देश
इस्लामाबाद में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने अधिकारियों को Gilgit-Baltistan में विकास कार्यों को प्राथमिकता देने को कहा है। प्रशासन का मुख्य फोकस प्रशासनिक बाधाओं को दूर करना और इन स्कीमों के लिए लगातार फंडिंग सुनिश्चित करना है। इन महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में 100-मेगावाट का सोलर पावर प्लांट और Naltar पावर प्रोजेक्ट का विस्तार शामिल है।
CPEC और रणनीतिक महत्व
इन प्रोजेक्ट्स का सीधा संबंध China-Pakistan Economic Corridor (CPEC) से है। यह एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क है जिसे चीन के शिनजियांग प्रांत को अरब सागर में स्थित पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से जोड़ने के लिए बनाया जा रहा है। सरकार का दावा है कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी क्षमता बढ़ाकर वे इस क्षेत्र को फेडरल इकोनॉमिक नेटवर्क से बेहतर ढंग से जोड़ना चाहते हैं।
भारत का रुख और कूटनीतिक विवाद
यह विकास कार्य भारत के लिए बेहद संवेदनशील मुद्दा है। भारत सरकार का मानना है कि Gilgit-Baltistan भारतीय भू-भाग का अभिन्न अंग है और इसे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों का हिस्सा माना जाता है। नई दिल्ली लगातार इन क्षेत्रों में निर्माण कार्यों का विरोध करती रही है और इसे अपनी क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन मानती है। इन प्रोजेक्ट्स में बाहरी पूंजी का निवेश स्थिति को और अधिक कूटनीतिक रूप से जटिल बना देता है।
प्रधानमंत्री Sharif खुद 1 नवंबर को इन प्रोजेक्ट्स की प्रगति की समीक्षा करने के लिए साइट का दौरा करेंगे। क्षेत्रीय स्थिरता पर नजर रखने वालों के लिए यह एक अहम घटना है, क्योंकि विवादित क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार अक्सर राजनयिक तनाव को बढ़ाता है।
