POK में बवाल: पाक मंत्री का बड़ा बयान, प्रदर्शनकारियों को बताया 'दुश्मन'

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AuthorAditya Rao|Published at:
POK में बवाल: पाक मंत्री का बड़ा बयान, प्रदर्शनकारियों को बताया 'दुश्मन'

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) के प्रदर्शनकारियों को भारत के समान 'दुश्मन' करार दिया है। उन्होंने बातचीत से साफ इनकार कर दिया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इलाके में चुनावी सुधारों और खराब जीवन स्थितियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर की गई हिंसक कार्रवाई की खबरें आ रही हैं।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) के प्रदर्शनकारियों को भारत के समान 'दुश्मन' बताकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। उनके इस बयान ने पाकिस्तानी सरकार के रुख को साफ कर दिया है कि वह प्रदर्शनकारियों से किसी भी तरह की बातचीत में शामिल नहीं होगी, जो लोग ज्यादा राजनीतिक अधिकार और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

बढ़ती हिंसा और विरोधाभासी बयान

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) द्वारा आयोजित एक मार्च के दौरान हुई हिंसक झड़प के बाद तनाव काफी बढ़ गया है। कमेटी का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई और दो दर्जन से ज्यादा घायल हो गए। वहीं, पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शनकारी हथियारबंद थे और उन्होंने ही संघर्ष शुरू किया था। जमीनी हकीकत की स्वतंत्र पुष्टि करना मुश्किल है, क्योंकि वहां की स्थिति बहुत विस्फोटक है।

ये झड़पें POK में पिछले कई महीनों से चल रहे व्यापक विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा हैं। प्रदर्शनकारी बढ़ती महंगाई, जरूरी चीजों की ऊंची कीमतों, बिजली की लगातार कटौती और शासन-प्रशासन से जुड़ी समस्याओं को लेकर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, जून 2026 की शुरुआत से अब तक कुल मौत का आंकड़ा 80 से अधिक हो चुका है, जिसमें प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा कर्मियों दोनों की जानें गई हैं।

भारत का कूटनीतिक रुख

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि POK में चल रहे चुनाव पाकिस्तान द्वारा अवैध कब्जे और मानवाधिकारों के उल्लंघन को छिपाने का एक प्रयास है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों सहित पूरा जम्मू और कश्मीर उसका अभिन्न अंग है। नई दिल्ली लगातार इस क्षेत्र में हो रहे अशांति का कारण व्यवस्थित आर्थिक शोषण और मौलिक अधिकारों से वंचित करना मानती है, न कि इसे अलग-थलग राजनीतिक घटनाक्रम।

निवेशक और विश्लेषक इस स्थिति पर नजर रख रहे हैं, क्योंकि क्षेत्रीय अस्थिरता बनी हुई है। कड़ी सुरक्षा के बीच हो रहे ये विधानसभा चुनाव जनता के विरोध और आर्थिक कठिनाइयों के बीच हो रहे हैं। अगला महत्वपूर्ण विकास यह होगा कि क्या पाकिस्तानी सरकार अपना कड़ा रुख बनाए रखती है या क्षेत्र को स्थिर करने के लिए प्रदर्शनकारियों की आर्थिक और प्रशासनिक शिकायतों को दूर करने का प्रयास करती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.