PM Modi का उज्बेकिस्तान दौरा: ट्रेड का लक्ष्य **$3 बिलियन** पार करने पर नजर

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
PM Modi का उज्बेकिस्तान दौरा: ट्रेड का लक्ष्य **$3 बिलियन** पार करने पर नजर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी **29-30 अगस्त** को ताशकंद की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और उज्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके **$3 बिलियन** तक पहुंचाना है। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि कैसे सरकार इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के जरिए कनेक्टिविटी की चुनौतियों को दूर करती है, जो व्यापारिक लॉजिस्टिक्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 29-30 अगस्त, 2026 को होने वाली ताशकंद यात्रा का मुख्य लक्ष्य भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आर्थिक सहयोग को नई गति देना है। अभी दोनों देशों के बीच व्यापार $1.3 से $1.5 बिलियन के दायरे में है, जिसे अगले 3 सालों में दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।

प्रमुख सेक्टर और इन्वेस्टमेंट ट्रीटी

इस दौरे में उन क्षेत्रों पर खास जोर दिया जाएगा जहां भारतीय कंपनियों का दबदबा है, जैसे कि फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल्स और आईटी सेक्टर। निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण अपडेट हाल ही में पूरी हुई 'बायलैटरल इन्वेस्टमेंट ट्रीटी' है, जो उज्बेकिस्तान में काम करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करेगी। उज्बेकिस्तान अब कच्चे माल के निर्यात के बजाय हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ सेक्टर में निवेश के नए अवसर खुल रहे हैं।

कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियां

भारत के व्यापारिक लक्ष्य 7,200 किलोमीटर लंबे 'इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर' (INSTC) पर काफी हद तक निर्भर हैं। हालांकि यह कॉरिडोर मध्य एशियाई बाजारों तक पहुंचने का सबसे सीधा रास्ता है, लेकिन ईरान के चाबहार पोर्ट जैसे ट्रांजिट हब पर निर्भरता के कारण लॉजिस्टिक्स अभी भी एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं। मिडिल ईस्ट में अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण सामान की आवाजाही में आने वाली रुकावटें भविष्य में व्यापार लागत को प्रभावित कर सकती हैं।

एग्जीक्यूशन रिस्क और क्षेत्रीय संदर्भ

जानकारों का मानना है कि समझौतों और जमीनी नतीजों के बीच अक्सर एक बड़ा अंतर होता है। जटिल रेगुलेटरी माहौल और सीमित कनेक्टिविटी के कारण पहले भी व्यापारिक लक्ष्यों को पूरा करने में देरी देखी गई है। प्रधानमंत्री मोदी अपनी इस यात्रा के बाद किर्गिस्तान भी जाएंगे, जहां वे 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या इन बैठकों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए कोई ठोस समयसीमा (Timeline) तय होती है, क्योंकि कंपनियों की अर्निंग्स का सीधा असर इसी बात पर निर्भर करेगा कि व्यापारिक बाधाएं कितनी तेजी से कम होती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.