अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने F और J वीज़ा धारकों के लिए अधिकतम 4 साल की अवधि तय कर दी है। पहले जहां छात्र अनिश्चित काल तक अमेरिका में रह सकते थे, अब इस नियम से हजारों भारतीय छात्रों के पढ़ाई की प्लानिंग और पोस्ट-स्टडी ट्रांज़िशन पर असर पड़ सकता है।
अमेरिका में छात्रों के लिए नियम कड़े
अमेरिकी सरकार ने विदेशी छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और मीडिया कर्मियों के लिए 'Duration of Status' की पुरानी नीति को खत्म कर दिया है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (Department of Homeland Security) द्वारा जारी नए नियमों के मुताबिक, F वीज़ा पर आए अंतर्राष्ट्रीय छात्र और J वीज़ा पर आए एक्सचेंज विजिटर्स को अब एक निश्चित अवधि के लिए ही अमेरिका में रहने की अनुमति मिलेगी, जो अधिकतम 4 साल होगी।
अकादमिक प्लानिंग पर असर
पहले छात्रों को उनकी डिग्री पूरी होने तक अमेरिका में रहने की इजाज़त थी, जिससे रिसर्च या डिग्री बदलने के दौरान फ्लेक्सिबिलिटी मिलती थी। नए नियम के तहत, जिन छात्रों को ज़्यादा समय की ज़रूरत होगी, उन्हें U.S. Citizenship and Immigration Services से बाकायदा एक्सटेंशन के लिए अप्लाई करना होगा। इस बदलाव से अब छात्रों पर नज़र रखने की ज़िम्मेदारी यूनिवर्सिटी स्टाफ की जगह फेडरल अथॉरिटीज की होगी, जिसमें एक्सटेंशन के लिए बायोमेट्रिक चेकिंग (biometric vetting) और बैकग्राउंड चेक (background checks) अनिवार्य होंगे। इसके अलावा, ग्रेजुएट होने के बाद F वीज़ा होल्डर्स के लिए देश छोड़ने या स्टेटस बदलने की ग्रेस पीरियड (grace period) भी 60 दिनों से घटाकर 30 दिन कर दी गई है।
भारतीय छात्रों पर सीधा प्रभाव
अमेरिका में पढ़ने वाले अंतर्राष्ट्रीय छात्रों में भारतीय छात्रों की संख्या काफी बड़ी है। 2024-25 अकादमिक ईयर के दौरान, अमेरिका में 363,000 से ज़्यादा भारतीय छात्र थे, जो कुल अंतर्राष्ट्रीय छात्रों का लगभग 31% है। उम्मीद है कि यह नया नियम उन छात्रों के लिए एडमिनिस्ट्रेटिव दिक्कतें खड़ी करेगा जो लंबी अवधि के डॉक्टरेट प्रोग्राम कर रहे हैं या जिन्हें अपने अकादमिक सफर में अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। सरकार का कहना है कि यह कदम उन लोगों द्वारा इमिग्रेशन सिस्टम के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है, जो देश में रहने के लिए अनिश्चित काल तक एनरोलमेंट स्टेटस बनाए रखते हैं।
शिक्षा और वित्तीय सेक्टर पर असर
हालांकि यह नियम मुख्य रूप से इमिग्रेशन से जुड़ा है, लेकिन इसका अप्रत्यक्ष असर भारतीय एजुकेशन कंसल्टेंसी (education consulting) और फाइनेंसियल सर्विसेज़ (financial services) सेक्टर पर भी पड़ेगा। जो कंपनियां विदेशी शिक्षा, यात्रा और फाइनेंसियल प्लानिंग में मदद करती हैं, वे छात्रों और उनके परिवारों द्वारा अमेरिका में पढ़ाई की व्यवहार्यता का फिर से आकलन करने के कारण डिमांड पैटर्न में बदलाव देख सकती हैं। निवेशक यह मॉनिटर कर सकते हैं कि आने वाली तिमाहियों में यूनिवर्सिटी एनरोलमेंट ट्रेंड्स (enrollment trends) और स्टूडेंट वीज़ा एप्लीकेशन वॉल्यूम (visa application volumes) पर क्या असर पड़ता है। छात्रों के लिए सबसे बड़ी चुनौती नए और कड़े फेडरल एक्सटेंशन प्रोसेस को नेविगेट करना होगी, जिससे 4 साल से ज़्यादा चलने वाले प्रोग्राम के लिए लीगल स्टेटस बनाए रखने की लागत और जटिलता बढ़ सकती है।
