अमेरिकी सीनेट में एक नया बिल लाया गया है जो रूस से तेल और गैस खरीदने वाले भारत और चीन जैसे देशों पर **100%** तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखता है। यह बिल दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के सम्मान में है और इसका मकसद रूस के युद्ध के लिए फंड रोकना है।
अमेरिकी सीनेट में सनसनीखेज प्रस्ताव
अमेरिका की सीनेट में द्विदलीय सांसदों के एक समूह ने रूस के ऊर्जा खरीदारों पर नकेल कसने के लिए एक अहम विधेयक को फिर से जीवित करने की कोशिश की है। यह प्रस्तावित कानून, जो दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम को समर्पित है, रूस के साथ बड़े पैमाने पर ऊर्जा व्यापार करने वाले देशों को निशाना बनाता है। इसमें खासतौर पर भारत और चीन पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिन पर प्रतिबंधों की तलवार लटक सकती है।
टैरिफ का नया गणित: 100% तक की मार!
इस नए प्रस्ताव के तहत, रूस से तेल और गैस के प्रमुख खरीदारों पर 100% तक का आयात शुल्क (tariff) लगाया जा सकता है। यह पिछले प्रस्तावों से एक बड़ा बदलाव है, जिसमें इससे भी कहीं ज्यादा टैरिफ का सुझाव दिया गया था। हालांकि, विधेयक में कुछ खास देशों के लिए छूट का प्रावधान भी है। वे देश जो अपने कुल ऊर्जा मिश्रण का 15% से कम रूसी प्राकृतिक गैस पर निर्भर हैं और इसे कम करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं, उन्हें छूट मिल सकती है। इन प्रावधानों का उद्देश्य व्हाइट हाउस को प्रतिबंधों को लागू करने में कुछ लचीलापन देना है, ताकि वैश्विक आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान के आर्थिक प्रभाव को कम किया जा सके।
भारत के ऊर्जा व्यापार पर असर की चिंता
अगर यह विधेयक पारित हो जाता है, तो भारत के ऊर्जा बाजारों और इससे जुड़े उद्योगों के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय बन सकता है। भारत रूसी कच्चे तेल का एक बड़ा खरीदार रहा है, जो घरेलू मांग को पूरा करने के लिए रियायती कीमतों का फायदा उठा रहा है। अमेरिका द्वारा ऐसे आयातों पर भारी टैरिफ लगाने से भारत को अपनी तेल खरीद की रणनीति बदलनी पड़ सकती है या फिर रिफाइनरियों के लिए लागत बढ़ सकती है। बाजार विश्लेषक इस बात पर बारीकी से नजर रख रहे हैं कि क्या ये संभावित प्रतिबंध कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ाएंगे या भारत प्रस्तावित छूट का लाभ उठा पाएगा।
सीनेट में विधेयक को मिली रफ्तार
यह विधेयक सीनेट में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जहाँ डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों नेताओं ने इस पर त्वरित फ्लोर वोट का संकेत दिया है। सीनेटर रिचर्ड ब्लूमथेल और अन्य समर्थक इस कानून को यूक्रेन के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में सीनेटर ग्राहम के लंबे प्रयासों की श्रद्धांजलि के रूप में पेश कर रहे हैं। दो दर्जन से अधिक सीनेटरों के समर्थन और सीनेट नेतृत्व के स्पष्ट समर्थन के साथ, उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में इस पर और बहस होगी। अंतिम परिणाम विधेयक की भाषा और अमेरिकी प्रशासन द्वारा अपने रणनीतिक सहयोगियों पर ऊर्जा आयात को लेकर कितना दबाव बनाने की इच्छा रखता है, इस पर निर्भर करेगा। निवेशकों को आगे की राजनयिक चर्चाओं और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय से किसी भी आधिकारिक बयान पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
