पत्रकार तानु ल ठाकुर की एक नई खोजी किताब ने H-1B वीज़ा सिस्टम में बड़े पैमाने पर शोषण का आरोप लगाया है। किताब में रिज्यूमे फुलाने और प्रॉक्सी इंटरव्यू जैसी बातों का जिक्र है, जिससे IT कंपनियों के बिजनेस मॉडल और विदेशी व अमेरिकी पेशेवरों पर पड़ने वाले असर पर फिर से ध्यान गया है।
IT कंसल्टेंसी का बिजनेस मॉडल
यह रिपोर्ट खासकर छोटे IT कंसल्टेंसी फर्मों पर केंद्रित है, जिन्हें इंडस्ट्री में 'बॉडी शॉप्स' भी कहा जाता है। जांच के अनुसार, ये फर्म अक्सर एक रेवेन्यू-शेयरिंग मॉडल का इस्तेमाल करती हैं, जिसमें कंसल्टिंग फर्म क्लाइंट से तय की गई बिलिंग रेट का एक बड़ा हिस्सा ले लेती है। जैसे-जैसे वर्कर और असली क्लाइंट के बीच बिचौलियों की संख्या बढ़ती जाती है, H-1B वीज़ा होल्डर की असली कमाई काफी कम हो जाती है। कहानी का दावा है कि इन तरीकों का मकसद विदेशी पेशेवरों की अमेरिका में करियर बनाने की मजबूरी का फायदा उठाकर कंपनी के मुनाफे को प्राथमिकता देना है।
बड़ी IT आउटसोर्सिंग कंपनियों पर असर
छोटे कंसल्टेंसी फर्मों से परे, यह किताब बड़ी IT आउटसोर्सिंग कंपनियों के लेबर प्रैक्टिसेज पर भी सवाल उठाती है। इसमें वीज़ा धोखाधड़ी और लेबर वायलेशन के आरोप शामिल हैं, जो यह इशारा करते हैं कि ग्लोबल IT डिलीवरी में लागत कम रखने की दौड़ ने सिस्टम में कई समस्याएं पैदा कर दी हैं। लेखक का तर्क है कि यह सिस्टम न केवल H-1B वर्कर्स को प्रभावित करता है, बल्कि यह अमेरिकी नौकरी चाहने वालों के लिए भी एक कॉम्पिटिटिव इम्बैलेंस पैदा करता है। ऐसा उन घरेलू प्रोफेशनल्स के मामलों से देखा जा सकता है जो इन आउटसोर्सिंग मॉडल्स के हावी क्षेत्रों में रोज़गार पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
मार्केट और रेगुलेटरी पहलू
भारतीय IT सर्विसेज सेक्टर पर नज़र रखने वाले निवेशकों के लिए, H-1B वीज़ा प्रोग्राम से जुड़ा रेगुलेटरी माहौल ऐतिहासिक रूप से एक महत्वपूर्ण जोखिम रहा है। इमिग्रेशन पॉलिसी में बदलाव या US अथॉरिटीज द्वारा वीज़ा कंप्लायंस पर बढ़ी हुई निगरानी से पहले ही प्रमुख भारतीय IT कंपनियों के लिए ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ी है और कंप्लायंस का बोझ बढ़ा है। हालांकि भारत की लार्ज-कैप IT फर्म्स अमेरिका में अपनी वर्कफोर्स को लोकल बनाने के लिए काम कर रही हैं ताकि H-1B वीज़ा पर निर्भरता कम हो सके, लेकिन सिस्टमैटिक दुरुपयोग के निष्कर्षों से कोई भी लेजिस्लेटिव या एडमिनिस्ट्रेटिव क्रैकडाउन इन कंपनियों की हायरिंग फ्लेक्सिबिलिटी और प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित कर सकता है। निवेशक कंपनियों की एनुअल रिपोर्ट्स में उनके वीज़ा कंप्लायंस फ्रेमवर्क, मुकदमेबाजी के जोखिमों और अस्थायी वर्क वीज़ा पर निर्भरता कम करने के उनके प्रयासों की प्रगति से जुड़ी डिस्क्लोजर पर नज़र रख सकते हैं।
