नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह **24 सितंबर, 2026** को 81वीं UN जनरल असेंबली को संबोधित करेंगे। भोटेकोशी बाढ़ की भारी तबाही के बाद, नेपाल सरकार अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्लाइमेट रिपेरेशंस की मांग करने जा रही है।
भोटेकोशी बाढ़ की त्रासदी के एक महीने बाद, नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह 24 सितंबर, 2026 को न्यूयॉर्क में 81वीं UN जनरल असेंबली में अंतरराष्ट्रीय मंच पर होंगे। उनका मुख्य एजेंडा इस आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए वित्तीय मदद जुटाना है। 26 अगस्त को आए आइस-रॉक हिमस्खलन के कारण आई इस विनाशकारी बाढ़ में 1,369 लोगों की जान गई और 5,132 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं।
आर्थिक दबाव और पुनर्निर्माण
नेपाली सरकार ने 'फंड फॉर रिस्पॉन्डिंग टू लॉस एंड डैमेज' से औपचारिक सहायता मांगी है। वर्तमान अनुमानों के अनुसार, देश में पुनर्निर्माण का कुल खर्च $4.78 अरब (USD) आंका गया है, जिसने नेपाल के राजकोषीय बजट पर भारी दबाव बना दिया है।
लंबी अवधि का लक्ष्य
आपातकालीन राहत के अलावा, नेपाली प्रतिनिधिमंडल विकसित देशों से रियायती क्लाइमेट फाइनेंस की पैरवी करेगा। इसका उद्देश्य क्लाइमेट-रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर और स्मार्ट एग्रीकल्चर की ओर बढ़ना है। यदि सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फंड मिलता है, तो इससे घरेलू कैपिटल खर्च का बोझ कम होगा और उत्तरी क्षेत्रों में सड़कों, बिजली लाइनों और पुलों की बहाली तेज हो सकेगी।
हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय क्लाइमेट एड की प्रक्रिया जटिल और लंबी होती है, जो शायद तत्काल लिक्विडिटी उपलब्ध न करा सके। इस यात्रा की सफलता न केवल नेपाल के इंफ्रास्ट्रक्चर की रिकवरी तय करेगी, बल्कि आगामी फाइनेंशियल क्वार्टर्स में देश के कर्ज के प्रबंधन पर भी सीधा असर डालेगी।
