Nepal Infrastructure: हिमालयन सुनामी के बाद बदलेगा इंफ्रा पॉलिसी का खाका, हाइड्रोपावर सेक्टर पर बढ़ेगा दबाव

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Nepal Infrastructure: हिमालयन सुनामी के बाद बदलेगा इंफ्रा पॉलिसी का खाका, हाइड्रोपावर सेक्टर पर बढ़ेगा दबाव

26 अगस्त को आए विनाशकारी हिमस्खलन में **1,400** से ज्यादा लोगों की मौत के बाद नेपाल सरकार अपनी आपदा और इंफ्रास्ट्रक्चर रणनीति को पूरी तरह से बदल रही है। इसका सीधा असर हाइड्रोपावर और नदी किनारे चल रहे प्रोजेक्ट्स पर पड़ेगा।

नीति में बड़ा बदलाव

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने 26 अगस्त की घटना को 'हिमालयन सुनामी' करार दिया है। इस त्रासदी के बाद अब सरकार वैज्ञानिक डेटा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के साथ एक नए 'क्लाइमेट-फर्स्ट' स्टेट सिस्टम की ओर कदम बढ़ा रही है।

निवेशकों के लिए जोखिम

नेपाल का हाइड्रोपावर सेक्टर, जो देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता का मुख्य स्तंभ है, अब अस्तित्व के संकट का सामना कर रहा है। सरकार के नए नियमों के बाद:

  • सख्त निगरानी: फ्यूचर एनर्जी और ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट्स को कड़ी स्क्रूटनी से गुजरना होगा।
  • कैपिटल कॉस्ट: नए सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के कारण शुरुआती कैपिटल रिक्वायरमेंट में बढ़ोतरी की संभावना है।
  • समयसीमा: प्रोजेक्ट पूरा होने के समय में देरी हो सकती है, जिससे लंबी अवधि के रिटर्न प्रभावित हो सकते हैं।

नई रेगुलेटरी फ्रेमवर्क

विदेश मंत्रालय फिलहाल 'पोस्ट-डिजास्टर असेसमेंट' पर काम कर रहा है, जो आने वाले समय में नई पॉलिसी का आधार बनेगा। कंपनियों को अब ऊंचे इंश्योरेंस खर्च और कठिन पर्यावरणीय जांच (Environmental Impact Assessment) के लिए तैयार रहना होगा। जो निवेशक नेपाल के बुनियादी ढांचे में पैसा लगा रहे हैं, उन्हें अब प्रोजेक्ट की गति से ज्यादा उसकी भौगोलिक सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.