तिब्बत में ग्लेशियर फटने के बाद नेपाल के भोटेकोशी नदी क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। रेस्क्यू के लिए **13,000** से ज्यादा सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। अब तक **359** लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि **910** लोग अभी भी लापता हैं।
तिब्बत में ग्लेशियर फटने के कारण आई अचानक बाढ़ ने नेपाल के भोटेकोशी नदी के आसपास के इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया है। 27 अगस्त, 2026 तक की जानकारी के मुताबिक, स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जैसे जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, जहाँ पुलों, सड़कों और रिहायशी इलाकों को भारी नुकसान पहुँचा है।
युद्ध स्तर पर राहत कार्य
इस मानवीय संकट से निपटने के लिए नेपाल सरकार ने 13,295 सुरक्षाकर्मियों को मैदान में उतारा है। इसमें नेपाल पुलिस के 7,250 जवान, नेपाल आर्मी के 4,200 सैनिक और सशस्त्र पुलिस बल के 1,845 जवान शामिल हैं। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने प्रभावित जिलों का दौरा कर राहत कार्यों की कमान संभाली है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यापार पर असर
अब तक वायुसेना ने 69 सॉर्टीज (sorties) पूरी कर ली हैं ताकि फंसे हुए लोगों को निकाला जा सके। इस आपदा में 19 पुल और करीब 40 किलोमीटर लंबी सड़कें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। इसके चलते इंडो-नेपाल मैत्री बस सेवा भी सस्पेंड कर दी गई है, जिससे भारत और नेपाल के बीच सीमा पार आवाजाही पर बुरा असर पड़ा है।
आर्थिक चुनौतियों का जोखिम
सरकार ने राहत के लिए तुरंत फंड जारी किया है, जिससे करीब 3,500 विस्थापितों को अस्थायी आवास और दवाइयां मुहैया कराई जा रही हैं। धुनचे और बिदुर की सैन्य बैरकों में ट्राइएज कैंप बनाए गए हैं। हालांकि, भविष्य की चुनौतियां अभी कम नहीं हुई हैं। भोटेकोशी क्षेत्र में नई झीलों (barrier lakes) के बनने से दोबारा बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है। कठिन पहाड़ी रास्ता और खराब मौसम रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे बड़ी बाधा बन रहे हैं। नेपाल की अर्थव्यवस्था पर राहत और पुनर्निर्माण का भारी आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है, जिस पर निवेशकों और क्षेत्रीय जानकारों की नजर बनी हुई है।
