Rasuwa Flood: नेपाल सरकार ने बनाई विशेष कमेटी, हाइड्रोपावर और इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान का होगा आकलन

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Rasuwa Flood: नेपाल सरकार ने बनाई विशेष कमेटी, हाइड्रोपावर और इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान का होगा आकलन

नेपाल की संसद ने 26 अगस्त को आए रसुवा (Rasuwa) फ्लैश फ्लड्स के आर्थिक असर का पता लगाने के लिए सात सदस्यीय उप-कमेटी बनाई है। इस टीम को अपनी रिपोर्ट **18 सितंबर, 2026** तक सौंपनी होगी, जो भविष्य में हाइड्रोपावर और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के पुनर्निर्माण के लिए बेहद जरूरी है।

नुकसान का ब्यौरा और चुनौतियां

नेपाल की हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स फाइनेंस कमेटी ने सांसद सुशीला खड़का के नेतृत्व में यह सात सदस्यीय पैनल गठित किया है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानें खिसकने से आई इस प्राकृतिक आपदा ने भोटेकोशी नदी घाटी में भारी तबाही मचाई है। इस हादसे में 1,300 से ज्यादा लोगों की जान गई है और हजारों अभी भी लापता हैं।

आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो ऊर्जा क्षेत्र को गहरा झटका लगा है। कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जो नेपाल के एनर्जी ग्रिड की रीढ़ हैं। इसके अलावा, पुलों और सड़कों के बह जाने से सप्लाई चेन और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में राहत कार्य बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। निवेशकों के लिए चिंता का विषय यह है कि पावर प्लांट्स की तबाही से एनर्जी ऑपरेटर्स के रेवेन्यू पर सीधा असर पड़ेगा और सरकार पर इंफ्रास्ट्रक्चर मरम्मत का भारी वित्तीय बोझ बढ़ेगा।

क्लाइमेट फाइनेंस की ओर कदम

नेपाल इस आपदा को अपनी अंतरराष्ट्रीय जलवायु कूटनीति (Climate Diplomacy) के एक मौके के रूप में भी देख रहा है। काठमांडू का तर्क है कि ग्लोबल क्लाइमेट चेंज के कारण ग्लेशियर्स तेजी से पिघल रहे हैं, जिसकी कीमत नेपाल जैसे देशों को चुकानी पड़ रही है। इस ऑडिट के जरिए नेपाल अंतरराष्ट्रीय मंचों पर 'लॉस एंड डैमेज' कंपनसेशन और क्लाइमेट फाइनेंस की मांग को और मजबूती से रखेगा। आगामी महीनों में इस रिपोर्ट से मिलने वाले आंकड़े न केवल पुनर्निर्माण की दिशा तय करेंगे, बल्कि विदेशी सहायता और बजट एलोकेशन पर भी गहरा असर डालेंगे।

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