नेपाल में आई भीषण बाढ़ से इंफ्रास्ट्रक्चर को करीब **₹200 अरब** का भारी नुकसान हुआ है। इस आपदा ने **430 MW** से ज्यादा की हाइड्रोपावर क्षमता को ठप कर दिया है, जिससे मार्केट में हाइड्रोज़ और इंश्योरेंस स्टॉक्स में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
नेपाल में 26 अगस्त, 2026 को ग्लेशियर लेक फटने और उसके बाद आई भीषण बाढ़ ने तबाही मचा दी है। इस आपदा से इंफ्रास्ट्रक्चर को अनुमानित ₹200 अरब का नुकसान हुआ है। भोटे कोशी और त्रिशूली नदी के किनारों पर स्थित 41 पुल और 42 किलोमीटर लंबी सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे वहां का लॉजिस्टिक्स सिस्टम पूरी तरह ठप हो गया है।
पावर सेक्टर पर बड़ा असर
एनर्जी सेक्टर को सबसे बड़ा झटका लगा है। नेशनल ग्रिड से 430 MW की ऑपरेशनल हाइड्रोपावर क्षमता बाहर हो गई है। इसमें 111 MW का 'Rasuwagadhi' हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी शामिल है, जिसे भारी मलबे और स्ट्रक्चरल डैमेज के कारण बंद करना पड़ा है। इसके अलावा, निर्माणधीन 470 MW की क्षमता वाली परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे प्रोजेक्ट की लागत में भारी बढ़ोतरी की आशंका है।
मार्केट का रिएक्शन (NEPSE पर दबाव)
इस खबर के बाद Nepal Stock Exchange (NEPSE) में निवेशकों ने अपने शेयर बेचना शुरू कर दिया। 26 अगस्त को हाइड्रोपावर और नॉन-लाइफ इंश्योरेंस सब-इंडिसेज में जोरदार गिरावट देखी गई। हाइड्रोपावर कंपनियों के लिए रेवेन्यू का नुकसान और मरम्मत का भारी खर्च सबसे बड़ी चिंता है। वहीं, इंश्योरेंस कंपनियों पर डैमेज क्लेम्स की बाढ़ आने का खतरा मंडरा रहा है।
आगे का खतरा
स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। हाइड्रोलॉजिकल एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि ऊपरी इलाकों में नई 'बैरियर लेक्स' बनी हैं, जिनके फटने का खतरा है। इससे रिकवरी का काम और मुश्किल हो गया है। फिलहाल, निवेशक अब पावर प्लांट्स की बहाली की टाइमलाइन और इंश्योरेंस क्लेम्स के फाइनल आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं।
