नेपाल में ग्लेशियर फटने से आई आपदा ने भारी तबाही मचाई है। अब तक **734** लोगों की जान जा चुकी है और लगभग **2,500** लोग लापता हैं। इस त्रासदी ने **13** हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह प्रभावित किया है, जिससे **748 MW** की बिजली आपूर्ति संकट में है।
नेपाल में 26 अगस्त, 2026 को ग्लेशियर और चट्टानों के खिसकने से आई आपदा ने देश के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 734 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,498 लोग अभी भी लापता हैं। पुलों और परिवहन मार्गों के नष्ट होने से बचाव कार्यों में बड़ी बाधा आ रही है।
पावर सेक्टर पर बड़ा प्रहार
रसुवा और नुवाकोट जिलों में स्थित 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा है। इन प्रोजेक्ट्स की कुल क्षमता 748 MW है, जो फिलहाल पूरी तरह बंद हो गई है। निवेशकों को डर है कि इससे कंपनियों को भारी रेवेन्यू लॉस होगा और भविष्य में बिजली की किल्लत बढ़ सकती है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के पानी का स्तर कम होने के बावजूद, टर्बाइनों और पावर हाउसों की मरम्मत में लंबा समय लगने की आशंका है।
इकोनॉमी और इंश्योरेंस सेक्टर पर भारी दबाव
इस आपदा का असर नेपाल के स्टॉक एक्सचेंज (NEPSE) पर भी दिख रहा है, जहां हाइड्रोपावर और नॉन-लाइफ इंश्योरेंस के शेयरों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुनर्निर्माण (Reconstruction) पर आने वाला खर्च नेपाल की जीडीपी का 10% यानी करीब $4 से $5 अरब डॉलर तक हो सकता है। बीमा कंपनियों के सामने दावों का अंबार लगने वाला है, जिससे पूरे फाइनेंशियल सेक्टर पर दबाव बढ़ गया है।
लॉजिस्टिक और रिकवरी की चुनौतियां
पृथ्वी हाईवे का एक हिस्सा ढह जाने और 19 बड़े पुलों के बह जाने से कई इलाके पूरी तरह कट गए हैं। राहत सामग्री पहुंचाने में आ रही दिक्कतों के कारण सरकार के सामने एक बड़ी आर्थिक और लॉजिस्टिक चुनौती खड़ी है। बाजार अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए है कि सरकार बिना राजकोषीय घाटा बढ़ाए इस भारी-भरकम पुनर्निर्माण का खर्च कैसे उठाएगी।
