नेपाल में विनाशकारी फ्लैश फ्लड्स के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर **1,356** हो गई है। इस आपदा ने देश के टूरिज्म और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे स्थानीय इकोनॉमी की रिकवरी पर सवाल खड़े हो गए हैं।
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद आज देश शोक में डूबा है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आए भीषण हिमस्खलन और ग्लेशियर टूटने की घटना के कारण अब तक 1,356 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि करीब 5,000 लोग अभी भी लापता हैं। यह नेपाल के आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी आपदाओं में से एक है।
राहत और बचाव कार्यों में चुनौती
रसुवा और नुवाकोट जिलों में भारी तबाही के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद मुश्किल हो गया है। टनल स्पेशलिस्ट अर्नोल्ड डिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की टीम मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों को ढूंढने में जुटी है। स्थानीय प्रशासन ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में लूटपाट रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं।
इकोनॉमी पर गहरा असर
पर्यटन, जो नेपाल की इकोनॉमी की रीढ़ है, इस आपदा के कारण गहरे संकट में है। ऑटम ट्रैवल सीजन से ठीक पहले आई इस तबाही से इंटरनेशनल टूरिस्टों के आने पर असर पड़ने की चिंता है। सड़कें, पुल और बुनियादी सुविधाएं टूटने से लॉजिस्टिकल चुनौतियां बढ़ गई हैं।
एनर्जी सेक्टर को बड़ा नुकसान
बाढ़ की चपेट में आए कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के तबाह होने से बिजली आपूर्ति और क्रॉस-बॉर्डर एनर्जी कोऑपरेशन पर भी संकट गहरा गया है। इन महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की मरम्मत में भारी निवेश की जरूरत होगी, जिससे सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ेगा। अब पड़ोसी देशों के साथ ट्रेड कनेक्टिविटी और रुकी हुई ट्रेन सेवाओं को बहाल करने की दिशा में सरकार काम कर रही है, लेकिन रिकवरी की गति ही भविष्य की आर्थिक स्थिरता तय करेगी।
