नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर ग्लेशियर फटने से भीषण आपदा आ गई है। इस हादसे में **290** भारतीय नागरिक लापता बताए जा रहे हैं, जबकि रेस्क्यू ऑपरेशन में अब तक **84** लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है।
नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर गिरने के कारण उपजे मानवीय संकट ने विकराल रूप ले लिया है। 28 अगस्त, 2026 तक की स्थिति के अनुसार, भारतीय विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि 290 भारतीय नागरिक अभी भी संपर्क से बाहर हैं। 26 अगस्त को हुई इस त्रासदी में अब तक कुल 392 लोगों की मौत की खबर है, जिसमें सबसे ज्यादा मौतें नेपाल में हुई हैं।\n\nरेस्क्यू टीमों ने अभी तक 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला है, जिनमें Trishuli-I हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के 63 कर्मचारी भी शामिल हैं। तबाही के कारण सड़कें और पुल पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं, जिससे राहत कार्य में भारी मुश्किलें आ रही हैं। प्रभावित इलाकों में कम्युनिकेशन नेटवर्क ठप होने से परिजनों में भारी चिंता है।\n\n### नए खतरे की आहट\n\nतिब्बत में चोचेन और पुरुपु सांगपो नदियों के पास एक विशाल बैरियर लेक (Barrier Lake) बनने की खबर ने चिंता बढ़ा दी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यह झील टूटती है, तो लाखों क्यूबिक मीटर पानी नीचे की ओर आ सकता है, जिससे बाढ़ का खतरा और बढ़ जाएगा।\n\n### रेस्क्यू में आ रही अड़चनें\n\nभारी कीचड़ और मलबे के कारण बचाव कार्यों में भारी मशीनरी का इस्तेमाल करना नामुमकिन हो गया है। इसके अलावा, लैंडस्लाइड का खतरा रेस्क्यू टीम की जान भी जोखिम में डाल रहा है। फिलहाल भारत और नेपाल की एजेंसियां सुरक्षित निकासी के लिए तालमेल बिठा रही हैं। स्थिति को देखते हुए नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे केवल विदेश मंत्रालय और स्थानीय आपदा प्रबंधन सेल से जारी आधिकारिक अपडेट पर ही भरोसा करें।
