अगस्त 2026 में ग्लेशियर फटने और उसके बाद आई बाढ़ के कारण नेपाल-चीन व्यापार मार्ग ठप हो गया है। त्यौहारों के सीजन से ठीक पहले सप्लाई चेन रुकने से NEPSE में काफी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
सप्लाई चेन पर गहरा संकट
अगस्त के अंत में हुए ग्लेशियर हादसे के बाद आई भीषण बाढ़ ने रासुवागढी-केरुंग (Rasuwagadhi-Kerung) बॉर्डर को पूरी तरह बंद कर दिया है। करीब 40 किलोमीटर लंबी सड़कें और कई पुल तबाह होने से 500 से 600 कंटेनर रास्ते में ही फंस गए हैं। त्योहारी सीजन (दशईं, तिहार और छठ) नजदीक होने के कारण कपड़ों, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य जरूरी सामानों की भारी कमी होने की आशंका है, जिससे महंगाई बढ़ सकती है।
बाजार और सेक्टर पर असर
इस आपदा का सीधा असर नेपाल स्टॉक एक्सचेंज (NEPSE) पर पड़ रहा है। निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल है, जो मुख्य रूप से दो सेक्टरों के लिए चिंताजनक है:
- हाइड्रोपावर सेक्टर: अब तक 13 से अधिक पावर प्रोजेक्ट्स को नुकसान की खबर है, जिससे इनकी ऑपरेशनल क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं।
- इंश्योरेंस सेक्टर: इंफ्रास्ट्रक्चर और संपत्ति के भारी नुकसान के बाद नॉन-लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों पर क्लेम्स (Claims) का अंबार लगने की संभावना है।
आर्थिक नुकसान का आंकड़ा
कुल इंफ्रास्ट्रक्चर डैमेज का अनुमान NPR 400 बिलियन से अधिक लगाया जा रहा है। सरकार के लिए पुनर्निर्माण एक बड़ी चुनौती है, जो देश की लिक्विडिटी और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी को प्रभावित कर सकती है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार कितनी जल्दी कनेक्टिविटी बहाल करती है और इंश्योरेंस कंपनियों के सामने दावों का कितना बड़ा बोझ आता है।
