प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न्यूज़ीलैंड के दौरे पर हैं, जहाँ वो भारत-न्यूज़ीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और $20 अरब के निवेश पर तेज़ी से काम करने पर ज़ोर देंगे। इस दौरान कपड़ा, आईटी और शिक्षा जैसे सेक्टरों में व्यापार बढ़ाने पर चर्चा होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को न्यूज़ीलैंड पहुंचे, जो 40 सालों में किसी भारतीय नेता का पहला दौरा है। इस कूटनीतिक मिशन का मुख्य एजेंडा भारत-न्यूज़ीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को मंज़ूरी दिलाना और $20 अरब के निवेश की राह खोलना है। यह दौरा तीन देशों की यात्रा का अंतिम पड़ाव है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया भी शामिल थे।
भारतीय एक्सपोर्ट्स पर FTA का असर
अप्रैल में साइन किए गए इस ट्रेड एग्रीमेंट का लक्ष्य भारतीय एक्सपोर्ट्स पर लगने वाले टैरिफ को खत्म करना है। भारतीय निवेशकों के लिए, इसका सबसे बड़ा असर कपड़ा (Textiles) और चमड़ा (Leather) जैसे सेक्टरों में दिखेगा, जिन्हें न्यूज़ीलैंड के बाज़ार में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, यह डील भारतीय आईटी (IT) और प्रोफेशनल सर्विसेज कंपनियों के लिए भी वहां अपनी पैठ बनाने के रास्ते आसान करेगी। न्यूज़ीलैंड सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, उनके भारत को होने वाले आधे से ज़्यादा एक्सपोर्ट्स भी लागू होने पर तुरंत टैरिफ-फ्री हो जाएंगे, जिससे कुछ घरेलू सामानों में कॉम्पिटिशन बढ़ सकता है, वहीं कुछ की लागत कम हो सकती है।
लागू करने में चुनौतियां
आर्थिक लक्ष्य बड़े हैं, लेकिन इस एग्रीमेंट को न्यूज़ीलैंड के भीतर राजनीतिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स के लिए वीज़ा नियमों को आसान बनाने के प्रस्ताव का न्यूज़ीलैंड फर्स्ट पार्टी ने विरोध किया है, जो प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की सरकार का एक अहम कोएलिशन पार्टनर है। इमिग्रेशन (Immigration) से जुड़े मुद्दे पर सहमति बनना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। बाज़ार पर नज़र रखने वालों के लिए, इन वीज़ा पाथवेज़ का हल एक महत्वपूर्ण बिंदु है, क्योंकि यह स्किल्ड लेबर की आवाजाही और भारत की शिक्षा व आईटी सर्विसेज के एक्सपोर्ट्स की ग्रोथ को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।
द्विपक्षीय व्यापार की स्थिति
भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार करीब $1.15 अरब है, जो दोनों देशों की आर्थिक क्षमता को देखते हुए काफी कम है। व्यापार के अलावा, इस बातचीत में समुद्री सुरक्षा, डिफेंस और एग्री-टेक (Agri-tech) जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी एजेंडा शामिल है। $20 अरब का इन्वेस्टमेंट टारगेट अगले 15 सालों में लागू किया जाना है, और दोनों देश प्रोजेक्ट अप्रूवल को तेज़ी से निपटाने के लिए एक समर्पित मैकेनिज्म पर विचार कर रहे हैं। इन निवेशों की सफलता रेगुलेटरी माहौल और इन संस्थागत मैकेनिज्म की गति पर निर्भर करेगी। निवेशकों को उन खास सेक्टरों पर नज़र रखनी चाहिए जहाँ इन निवेशों को लक्षित किया गया है, और FTA के फाइनल ऑपरेशनलucidation के लिए दी गई किसी भी समय-सीमा पर ध्यान देना चाहिए।
