अब कई देशों में वीजा के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस (Travel Insurance) लेना जरूरी हो गया है, जिससे भारतीय जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के लिए इंटरनेशनल ट्रैवल प्लान्स की मांग बढ़ सकती है। यह ग्लोबल ट्रेंड बीमा कंपनियों के लिए कमाई का नया जरिया बन रहा है, वहीं ट्रैवल बुकिंग प्लेटफॉर्म भी भारतीय पर्यटकों के लिए इन जरूरी प्रोडक्ट्स को बंडल करने में जुट गए हैं।
क्या हुआ है?
दुनिया भर में यात्रा के नियम बदल रहे हैं। अब कई देश एंट्री के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस को एक जरूरी शर्त बना रहे हैं। यूरोप के शेंगेन जोन (Schengen zone), अर्जेंटीना और कतर जैसे लोकप्रिय डेस्टिनेशन पर अब मेडिकल कवरेज का प्रूफ मांगा जा रहा है। इसमें अक्सर इमरजेंसी मेडिकल खर्चों और हॉस्पिटल के लिए कम से कम €30,000 (लगभग ₹27 लाख) की लिमिट रखी गई है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि अगर कोई यात्री बीमार पड़ता है, तो स्थानीय हेल्थकेयर सिस्टम पर बोझ कम हो सके। भारतीय यात्रियों के लिए, जो पहले इसे एक ऑप्शनल सेफ्टी मेज़र मानते थे, अब यह वीजा अप्लाई करने की प्रोसेस का एक जरूरी हिस्सा बन गया है।
बीमा कंपनियों के लिए फाइनेंशियल असर
भारतीय जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के लिए, यह ट्रेंड ट्रैवल इंश्योरेंस सेगमेंट को बढ़ावा दे रहा है। ट्रैवल इंश्योरेंस आमतौर पर बीमा कंपनियों के लिए एक हाई-मार्जिन प्रोडक्ट होता है, क्योंकि क्लेम की फ्रीक्वेंसी अप्रत्याशित होने के बावजूद, इसे अक्सर ग्लोबल नेटवर्क्स द्वारा मैनेज किया जाता है। जैसे-जैसे अधिक देश इन नियमों को लागू कर रहे हैं, पॉलिसी के लिए एड्रेसेबल मार्केट सीधे इंटरनेशनल ट्रैवल वॉल्यूम के साथ बढ़ रहा है।
भारतीय जनरल इंश्योरेंस सेक्टर के बड़े प्लेयर्स, जैसे ICICI Lombard General Insurance, HDFC Ergo (HDFC Bank की सब्सिडियरी) और Bajaj Allianz (Bajaj Finserv का हिस्सा), अक्सर इस मार्केट का एक बड़ा हिस्सा कैप्चर करते हैं। ज्यादा मैंडेटरी होने से यात्रियों को पॉलिसी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे इन कंपनियों को अपने 'Other Than Motor' (नॉन-मोटर) इंश्योरेंस पोर्टफोलियो को बढ़ाने में मदद मिलती है। इन फर्मों के लिए, अधिक पॉलिसी जारी होने से प्रीमियम कलेक्शन बेहतर होता है, हालांकि प्रॉफिटेबिलिटी पॉलिसी अवधि के दौरान सेटल किए गए एक्चुअल क्लेम पर निर्भर करती है।
ट्रैवल टेक और इंश्योरेंस का कनेक्शन
सिर्फ इंश्योरेंस कंपनियां ही नहीं, बल्कि ट्रैवल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म भी इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं। MakeMyTrip और EaseMyTrip जैसे बड़े प्लेटफॉर्म इन प्रोडक्ट्स को डिस्ट्रीब्यूट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें से कई पोर्टल ने अपनी बुकिंग फ्लो में सीधे इंश्योरेंस ऑप्शन इंटीग्रेट किए हैं। जब ट्रैवल इंश्योरेंस अनिवार्य हो जाता है, तो इंश्योरेंस प्रोडक्ट के लिए 'कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट' कम हो जाती है, क्योंकि यात्री अपनी बुकिंग जर्नी के दौरान इसे सक्रिय रूप से ढूंढ रहे होते हैं। इससे बीमा कंपनियों को पॉइंट ऑफ सेल पर प्रीमियम कैप्चर करने के लिए ट्रैवल पोर्टल्स के साथ प्रभावी ढंग से पार्टनरशिप करने का मौका मिलता है।
रेगुलेटरी और कॉम्पिटिटिव रिस्क
हालांकि डिमांड बढ़ रही है, सेक्टर कुछ खास जोखिमों का सामना कर रहा है। सबसे बड़ा जोखिम रेगुलेटरी बदलाव का है; अगर देश मिनिमम कवरेज की अपनी शर्तों को बदलते हैं या कुछ खास प्रोवाइडर्स को स्वीकार करना बंद कर देते हैं, तो ऑपरेशनल दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा, ट्रैवल इंश्योरेंस मार्केट में कड़ी प्रतिस्पर्धा है। नए डिजिटल-फर्स्ट इंश्योरर्स और फिनटेक प्लेयर्स इस स्पेस में आ रहे हैं, जिससे प्राइसिंग प्रेशर बढ़ सकता है। निवेशकों को यह भी ध्यान देना चाहिए कि ट्रैवल इंश्योरेंस का रेवेन्यू ग्लोबल ट्रैवल डिमांड के प्रति सेंसिटिव होता है। अगर आर्थिक कारणों, भू-राजनीतिक तनावों या स्वास्थ्य संबंधी यात्रा प्रतिबंधों के कारण इंटरनेशनल ट्रैवल धीमा हो जाता है, तो इस इंश्योरेंस सेगमेंट में ग्रोथ कम हो सकती है।
निवेशक क्या ट्रैक करें?
इंश्योरेंस सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों को तिमाही नतीजों में नॉन-मोटर प्रीमियम इनकम की ग्रोथ को ट्रैक करना चाहिए। मुख्य इंडिकेटर यह है कि क्या कंपनियां अपने मौजूदा कस्टमर बेस को इन प्रोडक्ट्स को सफलतापूर्वक क्रॉस-सेल कर पा रही हैं। इसके अतिरिक्त, ट्रैवल प्लेटफॉर्म और ट्रैवल टेक कंपनियों के साथ पार्टनरशिप के संबंध में मैनेजमेंट की कमेंट्री पर भी ध्यान दें, क्योंकि ये डिस्ट्रीब्यूशन चैनल कम लागत और उच्च बिक्री वॉल्यूम बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। अंत में, ट्रैवल सेगमेंट में लॉस रेशियो पर ध्यान दें, जो बताता है कि बीमाकर्ता प्रीमियम के मुकाबले कितने क्लेम का भुगतान कर रहा है।
