Lenskart Solutions के शेयरों ने आज 52-Week High का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। कंपनी ने चीन में ऑप्टिकल ट्रेड के लिए एक नई सब्सिडियरी (Subsidiary) बनाने का ऐलान किया है, जिसके बाद स्टॉक ₹628.80 तक पहुंच गया। यह कदम कंपनी की पिछली तिमाही में हुई शानदार प्रॉफिट ग्रोथ के बाद आया है।
चीन में क्यों खोल रही है Lenskart नई कंपनी?
Lenskart Solutions ने अपनी ज्वाइंट वेंचर Baofeng Framekart Technology के जरिए चीन में एक स्टेप-डाउन सब्सिडियरी, Wenzhou Framekart Trade Co Ltd, का गठन किया है। इसे 17 अगस्त, 2026 को आधिकारिक मान्यता मिली है। यह नई कंपनी चश्मे के फ्रेम और संबंधित ऑप्टिकल टेक्नोलॉजी की खरीद, ट्रेडिंग और आयात-निर्यात पर फोकस करेगी। ज्वाइंट वेंचर की 95% हिस्सेदारी यह दर्शाती है कि कंपनी इस नई इकाई को अपनी सप्लाई चेन में पूरी तरह इंटीग्रेट करना चाहती है। चीन में सीधी मौजूदगी से कंपनी अपनी सोर्सिंग और सप्लाई क्षमताओं को और बेहतर बनाने का लक्ष्य रख रही है।
पिछली तिमाही के नतीजे थे शानदार
यह डेवलपमेंट ऐसे समय में आया है जब कंपनी मजबूत फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का अनुभव कर रही है। हालिया जून तिमाही में, Lenskart ने ₹222 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹60 करोड़ था। कंपनी की कंसॉलिडेटेड सेल्स में 43.27% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹2,714 करोड़ तक पहुंच गई। इस शानदार प्रदर्शन में कंपनी के इंटरनेशनल सेगमेंट का बड़ा योगदान रहा, जहां रेवेन्यू में 63.4% की ग्रोथ देखी गई। डोमेस्टिक मार्केट में भी कंपनी ने एवरेज सेलिंग प्राइस (ASP) में बढ़ोतरी दर्ज की है।
किन बातों पर रहेगी निवेशकों की नज़र?
हालांकि यह विस्तार ग्रोथ की संभावनाएं जगाता है, पर कुछ ऐसे फैक्टर्स हैं जिन पर बाजार की पैनी नजर है। चीन में परिचालन का विस्तार करना भू-राजनीतिक और रेगुलेटरी रिस्क के साथ आता है, जो कंपनी की स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, Lenskart का वैल्यूएशन काफी प्रीमियम है, जिसमें प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) मल्टीपल अक्सर 160 को पार कर जाता है। यह हाई-ग्रोथ, टेक-ड्रिवन रिटेल कंपनियों के लिए आम है, लेकिन कंपनी पर लगातार उम्मीदों से बढ़कर कमाई करने का दबाव भी बनाता है। प्रमोटर होल्डिंग का लगभग 17.5% होना भी एक अहम फैक्टर है, जिसका मतलब है कि स्टॉक की चाल पर इंस्टीट्यूशनल और पब्लिक निवेशकों की भावना का बड़ा असर पड़ता है।
भविष्य में, शेयरधारकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह नई इकाई ऑपरेशनल एफिशिएंसी में कैसे योगदान देती है और क्या कंपनी इन आंतर्राष्ट्रीय जोखिमों के बीच अपनी हाई-ग्रोथ की राह बनाए रख पाती है।
