अमेरिका की मध्यस्थता में रोम में हुई बातचीत के बाद लेबनान और इज़राइल दक्षिणी लेबनान में पायलट ज़ोन बनाने के करीब पहुंच गए हैं। इस योजना का मकसद सुरक्षा की ज़िम्मेदारी लेबनानी सेना को सौंपना और इज़राइली सैनिकों की चरणबद्ध वापसी सुनिश्चित करना है।
रोम में अमेरिका की मध्यस्थता में हुई अहम बातचीत के बाद लेबनान और इज़राइल सीमा पर शांति स्थापित करने की दिशा में एक नया कदम उठाने को तैयार हैं। दोनों देशों के बीच दक्षिणी लेबनान में कुछ पायलट ज़ोन बनाने पर सहमति बन गई है। इन ज़ोन में सुरक्षा का नियंत्रण इज़राइली सेना से लेबनानी सेना को सौंपा जाएगा।
हालांकि, इन पायलट ज़ोन की सटीक सीमाएं अभी गुप्त रखी गई हैं, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य इन इलाकों से सशस्त्र समूहों को हटाना और एक बड़े स्तर पर तनाव कम करने की रूपरेखा का परीक्षण करना है। यह जून में प्रस्तावित एक फ्रेमवर्क समझौते का विस्तार है, जिसका लक्ष्य सीमा पर लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करना है। उस समझौते में इज़राइली सैनिकों की वापसी के साथ स्थानीय मिलिटेंट समूहों के निरस्त्रीकरण की बात भी कही गई थी।
रणनीतिक चुनौतियां और क्षेत्रीय परिदृश्य
इस योजना के कार्यान्वयन में कई राजनीतिक और परिचालन संबंधी बाधाएं हैं। लेबनान सरकार पर इस बात का दबाव है कि पायलट ज़ोन से इज़राइली सैनिकों की महत्वपूर्ण वापसी सुनिश्चित हो। वहीं, लेबनानी सेना को इन क्षेत्रों में सुरक्षा बनाए रखने के लिए अपनी क्षमता साबित करनी होगी।
दूसरी ओर, दक्षिणी लेबनान में सक्रिय समूह इन सीधी वार्ताओं का विरोध कर रहे हैं और निरस्त्रीकरण की शर्तों का पालन करने से इनकार कर सकते हैं। इज़राइली अधिकारी भी अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं पर अडिग हैं। बाज़ारों और वैश्विक पर्यवेक्षकों की नज़र इस प्रक्रिया पर है, क्योंकि इन पायलट ज़ोन की सफलता को दोनों देशों के बीच एक व्यापक शांति संधि की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है। इससे लगभग आठ दशकों से चले आ रहे तकनीकी युद्ध की स्थिति समाप्त हो सकती है।
