दक्षिण कोरियाई कंपनियां अब अस्थायी एक्सपोर्ट मॉडल को छोड़ भारत में स्थायी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित कर रही हैं। रेगुलेटरी नियमों का पालन और स्थानीय सप्लाई चेन पर जोर इस बात का संकेत है कि ये कंपनियां भारतीय बाजार को लेकर गंभीर और लंबी अवधि की रणनीति अपना रही हैं।
दक्षिण कोरिया की छोटी और मध्यम स्तर की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अब भारतीय बाजार में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव ला रही हैं। अब तक ये कंपनियां सिर्फ डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए अपने उत्पाद भारत में बेचती थीं, लेकिन अब इनका फोकस भारत में ही स्थायी ठिकाना बनाने पर है।
नियमों पर विशेष जोर
बदलाव का सबसे बड़ा कारण है रेगुलेटरी नियमों के प्रति इनकी संजीदगी। पहले जहां कंपनियां बाजार में जगह बनाने के बाद सर्टिफिकेशन देखती थीं, वहीं अब ये कंपनियां BIS (Bureau of Indian Standards) रजिस्ट्रेशन, FSSAI लाइसेंस और कॉस्मेटिक इम्पोर्ट मंजूरी को कारोबार शुरू करने की पहली शर्त मान रही हैं। इसके लिए कंपनियां काफी बड़ा कैपिटल निवेश कर रही हैं, जिसे Gyeonggi Province सरकार और Korea Federation of SMEs का पूरा समर्थन मिल रहा है।
नई पार्टनरशिप और एक्सपोज
नई दिल्ली में अगस्त 2026 में होने वाला KoINDEX (Korea Industry Expo) इस बदलती तस्वीर का एक बड़ा हिस्सा है। अब इसे BeautySUM India, FoodIndx और KOREA BUILD जैसे तीन विशेष हिस्सों में बांट दिया गया है ताकि कोरियाई कंपनियां सीधे सही भारतीय खरीदारों तक पहुंच सकें।
ऑटोमोटिव सेक्टर में यह बदलाव साफ दिख रहा है। Gabriel India और HL Klemove India के बीच हालिया स्ट्रैटेजिक निवेश और भारत के MSME मंत्रालय व दक्षिण कोरिया के SMEs मंत्रालय के बीच अप्रैल 2026 का समझौता (MoU) यह दिखाता है कि दोनों देशों की सप्लाई चेन आपस में जुड़ रही हैं।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
हालांकि यह सब सकारात्मक है, लेकिन निवेशकों को यह ध्यान रखना होगा कि कंप्लायंस की लागत और स्थानीय स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग सेटअप करना काफी महंगा है। यह छोटी कंपनियों के बैलेंस शीट पर दबाव डाल सकता है। साथ ही, घरेलू दिग्गजों के बीच अपनी जगह बनाना एक चुनौती होगी। सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये कंपनियां भारतीय ग्राहकों की जरूरतों के हिसाब से अपने दाम और पैकेजिंग को कितनी जल्दी ढाल पाती हैं।
