Kolkata Airport पर एक मस्जिद की जगह को लेकर छिड़े विवाद ने अब ढाका में प्रदर्शन का रूप ले लिया है। प्रदर्शनकारी पश्चिम बंगाल के BJP MLA सौरव सिकदर की कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जिन्होंने एयरपोर्ट से मस्जिद को हटाने की वकालत की है। यह पूरा मामला एयरपोर्ट की सुरक्षा और विस्तार योजनाओं से जुड़ा है, जिसने राजनीतिक तनाव को भी हवा दे दी है।
सुरक्षा और संचालन संबंधी चिंताएं
BJP MLA सौरव सिकदर का कहना है कि मस्जिद की मौजूदा जगह एयरपोर्ट के हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में है, जो अक्सर VIP फ्लाइट्स के लिए इस्तेमाल होता है। उन्होंने दावा किया कि विशेषज्ञों और पायलटों ने खराब मौसम में सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। सिकदर के अनुसार, एयरपोर्ट के लॉन्ग-टर्म विस्तार योजनाओं को साकार करने के लिए मस्जिद को हटाना ज़रूरी है। एयरपोर्ट का प्रबंधन Airports Authority of India (AAI) करती है।
राजनीतिक तनाव और प्रशासनिक पक्ष
सिकदर ने ढाका में हो रहे प्रदर्शनों को उन्हें डराने की कोशिश बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इस मामले की जानकारी BJP लीडरशिप को दे दी है। MLA ने जोर देकर कहा कि एयरपोर्ट की ज़मीन का प्रशासन भारतीय केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। पश्चिम बंगाल में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान मचा हुआ है, जहां सिकदर ने राज्य के मंत्री सिद्दीकुल्ला चौधरी के साथ मिलकर मस्जिद हटाने की ज़रूरत और समय को लेकर सार्वजनिक रूप से बहस की है। सिकदर का इशारा है कि स्थानीय राजनीतिक विरोधी इस मुद्दे को भारत की सीमाओं से बाहर बढ़ाने में शामिल हो सकते हैं।
एयरपोर्ट विस्तार योजनाओं पर असर
Kolkata Airport पर ज़मीन के इस्तेमाल और आधुनिकीकरण को लेकर चल रही चर्चाओं में मस्जिद का स्थानांतरण एक बड़ा हिस्सा है। जहां एक ओर इस कदम के समर्थक सुरक्षा प्रोटोकॉल और बढ़ते यात्री इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत का हवाला दे रहे हैं, वहीं यह मामला धार्मिक और राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण चर्चा का विषय बन गया है। पहले भी स्थानीय इलाके में भीड़ को नियंत्रित करने और साइट के आसपास व्यवस्था बनाए रखने के लिए निषेधाज्ञा (prohibitory orders) जारी की जा चुकी हैं।
एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर नज़र रखने वाले निवेशक और स्टेकहोल्डर इस बात पर नज़र रखेंगे कि AAI इन स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच अपनी विस्तार परियोजनाओं को कैसे आगे बढ़ाता है। सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि एयरपोर्ट के विस्तार की समय-सीमा पर क्या असर पड़ता है और क्या प्रशासनिक या कानूनी समाधान बिना किसी और सामाजिक या राजनीतिक बाधा के योजनाओं को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ कर सकते हैं।
