तिब्बत में आए **4.9** तीव्रता के भूकंप और भारी बारिश ने नेपाल के मितेरी ब्रिज (Miteri Bridge) और कई प्रमुख सड़कों को तबाह कर दिया है। इस आपदा के चलते कैलाश मानसरोवर जाने वाला प्राइवेट रूट पूरी तरह बाधित हो गया है और करीब **400** तीर्थयात्री, जिनमें **105** से ज्यादा भारतीय शामिल हैं, फिलहाल संपर्क से बाहर हैं।
तिब्बत में आई इस प्राकृतिक आपदा ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के मुख्य प्राइवेट रूट को पूरी तरह बंद कर दिया है। सुबह 8:30 से 9:15 के बीच आई मूसलाधार बारिश और 4.9 मैग्नीट्यूड के भूकंप ने भोटे कोसी नदी में बाढ़ ला दी। इसके कारण नेपाल और चीन को जोड़ने वाला मितेरी ब्रिज जमींदोज हो गया है और रसुवा जिले में पृथ्वी हाईवे समेत कई सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं।
तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और रेस्क्यू
फिलहाल क्षेत्र में मोबाइल और फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क ठप होने के कारण करीब 384 से 400 तीर्थयात्री संपर्क से कट गए हैं। स्थानीय प्रशासन और टूर ऑपरेटर्स ने सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत अगले 48 से 72 घंटों के लिए सभी यात्राएं सस्पेंड कर दी हैं। नेपाल टूरिज्म बोर्ड फिलहाल स्थिति का जायजा ले रहा है। अच्छी खबर यह है कि भारत सरकार द्वारा संचालित लिपुलेख पास और नाथू ला पास पूरी तरह सुरक्षित और चालू हैं।
इकोनॉमी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर मार
इस साल करीब 25,000 भारतीय तीर्थयात्रियों के आने का अनुमान था, लेकिन इस हादसे ने पूरे टूरिज्म सीजन पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इस सड़क और पुल के टूटने का सीधा असर प्राइवेट ट्रेवल एजेंसियों की कमाई और इंश्योरेंस सेक्टर पर पड़ना तय है। इसके अलावा, क्षेत्र में कंस्ट्रक्शन और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के लिए भी चुनौतियां बढ़ गई हैं। फिलहाल, ट्रेकिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ नेपाल वैकल्पिक रास्तों जैसे हिल्सा और तातापानी को खोलने पर विचार कर रही है ताकि यात्रा को दोबारा शुरू किया जा सके।
