साल 2025 में भारतीय सेना के हमले से तबाह हुआ पाकिस्तान का बहावलपुर स्थित 'मरकज़ सुभान अल्लाह' (Markaz Subhan Allah) कॉम्प्लेक्स अब पूरी तरह से ठीक हो गया है। खुफिया रिपोर्टों की मानें तो इसे बनाने के लिए पाकिस्तानी हुकूमत ने जैश-ए-मोहम्मद (JeM) को **25 करोड़ PKR** दिए थे। यह भारत के लिए चिंता का विषय है क्योंकि यह जगह लंबे समय से भारत विरोधी गतिविधियों का अड्डा रही है।
2025 के हमले के बाद फिर खड़ा हुआ 'मरकज़ सुभान अल्लाह'
पाकिस्तान के बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का 'मरकज़ सुभान अल्लाह' (Markaz Subhan Allah) हेडक्वार्टर, जिसे मई 2025 में भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंधूर' के तहत निशाना बनाया था, अब पूरी तरह से फिर से बना दिया गया है। नई सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि मई 2025 के हमलों से क्षतिग्रस्त हुआ यह कॉम्प्लेक्स फिर से ऑपरेशनल हो गया है। गुंबदों की मरम्मत, नए मार्बल का काम और ताज़ा पेंटिंग से यह इस तरह से तैयार किया गया है कि पिछले हमलों के निशान लगभग गायब हो गए हैं।
पाक सरकार पर शक, 25 करोड़ PKR का फंड?
खुफिया एजेंसियों को मिली जानकारी के मुताबिक, यह माना जा रहा है कि पाकिस्तान सरकार ने जैश-ए-मोहम्मद (JeM) को इस टेरर बेस के पुनर्निर्माण के लिए करीब 25 करोड़ पाकिस्तानी रुपये (PKR) नकद दिए थे। इस कुल रकम में से लगभग 11 करोड़ PKR सिर्फ कॉम्प्लेक्स के मुख्य हॉल के निर्माण में खर्च होने की बात सामने आई है। मुख्य इमारत के साथ-साथ, इससे सटी हुई इमारतों, जिनमेंJeM कमांडरों के रहने की जगहें और एक मदरसा शामिल है, उन्हें भी ठीक कर दिया गया है।
क्यों है यह चिंता का विषय?
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि यह 18 एकड़ का कॉम्प्लेक्सJeM के लिए रिक्रूटमेंट (भर्ती) और ट्रेनिंग का एक अहम केंद्र है। यह जगह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में, अंतर्राष्ट्रीय सीमा से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित है और एक बड़े पाकिस्तान आर्मी कैंटोनमेंट के पास है। ऐतिहासिक तौर पर, इस अड्डे का इस्तेमाल भारत के खिलाफ कई बड़े हमलों के लिए किया गया है। ऐसे में इसके फिर से चालू होने से क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा बढ़ सकता है।
धीरे-धीरे हुआ पुनर्निर्माण
यह पुनर्निर्माण का काम धीरे-धीरे हुआ है। अप्रैल 2026 की शुरुआती रिपोर्ट्स में कंपाउंड में भारी मशीनरी और निर्माण वाहनों की मौजूदगी देखी गई थी। पिछले कुछ महीनों में, सैटेलाइट इमेजरी और जमीनी स्तर पर हुई जांच से पता चला है कि मलबा हटा दिया गया है और मुख्य ढांचे को हुए नुकसान की मरम्मत कर ली गई है, जो इस बात का संकेत देता है कि बेस को पुराने स्वरूप में लाने का एक गंभीर प्रयास किया गया है।
निवेशकों पर असर?
क्षेत्रीय भू-राजनीति पर नज़र रखने वाले निवेशकों और जानकारों के लिए, यह घटनाक्रम उपमहाद्वीप में जारी सुरक्षा चुनौतियों को उजागर करता है।JeM एक संयुक्त राष्ट्र-नामित आतंकवादी संगठन है, जिसका कोई सार्वजनिक वित्तीय या कॉर्पोरेट फुटप्रिंट नहीं है। हालांकि, इसकी ऑपरेशनल क्षमता और कथित तौर पर राज्य-स्तरीय समर्थन से इसके इंफ्रास्ट्रक्चर का सीधा असर क्षेत्रीय जोखिम प्रोफाइल पर पड़ता है। बाज़ार के जानकारों और सुरक्षा विशेषज्ञों की इन घटनाओं पर पैनी नज़र रहती है, क्योंकि ये कूटनीतिक संबंधों और सीमावर्ती क्षेत्रों में दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं।
