MSCI द्वारा इंडोनेशिया को 'स्टैंडअलोन' (Standalone) मार्केट में बदलने के प्रस्ताव के बाद Jakarta Composite Index में **11%** की बड़ी गिरावट आई है। इस खबर से विदेशी निवेशकों में हड़कंप मच गया है, जिससे साल 2026 में इंडेक्स अब तक **39%** टूट चुका है।
बाजार में मची खलबली
शुक्रवार को Jakarta Composite Index में आई 11% की गिरावट साल 1998 के एशियाई वित्तीय संकट के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है। बिकवाली इतनी तेज थी कि ऑथोरिटीज को बाजार में 30 मिनट के लिए ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। इंडोनेशियाई इक्विटीज के लिए यह साल बेहद खराब रहा है और साल 2026 की शुरुआत से अब तक इंडेक्स 39% नीचे आ चुका है।
क्यों MSCI का फैसला है खतरनाक?
MSCI का 'स्टैंडअलोन' मार्केट का दर्जा बहुत कम देशों को मिलता है। यदि इंडोनेशिया इस कैटेगरी में गया, तो यह उभरते बाजारों (Emerging Markets) के इंडेक्स से बाहर हो जाएगा। इसका सीधा असर पैसिव फंड्स और ETFs पर पड़ेगा, जिन्हें अनिवार्य रूप से इंडोनेशियाई शेयरों से अपना निवेश निकालना होगा क्योंकि वे अब उनके बेंचमार्क का हिस्सा नहीं रहेंगे।
गवर्नेंस पर उठे सवाल
MSCI ने इंडोनेशिया में पारदर्शिता की कमी, संदिग्ध ट्रेडिंग और रेगुलेटरी नियमों के कमजोर पालन को मुख्य कारण बताया है। कंपनी का मानना है कि हालिया सुधारों के बावजूद मार्केट में अभी भी बुनियादी समस्याएं बनी हुई हैं।
इकोनॉमी पर दबाव
इस क्रैश का असर करेंसी मार्केट पर भी दिख रहा है, जहाँ इंडोनेशियाई रुपिया डॉलर के मुकाबले 0.6% कमजोर होकर अगस्त के निचले स्तर पर पहुंच गया है। साथ ही, Moody’s और Fitch जैसी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के नेगेटिव आउटलुक ने निवेशकों का भरोसा और तोड़ दिया है। अब निवेशकों की नजर 30 अप्रैल, 2027 तक चलने वाले कंसल्टेशन पीरियड पर है, जिसके बाद 30 जून, 2027 को अंतिम फैसला लिया जाएगा।
