भारत में इजरायली दूतावास (Embassy of Israel) एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह अच्छी नहीं है। दूतावास ने 6 महीने की पॉलिटिकल इंटर्नशिप के लिए विज्ञापन निकाला है, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह इंटर्नशिप 'बिना पैसों' की है। सोशल मीडिया पर लोग और आलोचक इस पर कड़ी आपत्ति जता रहे हैं।
क्या हुआ है?
भारत में स्थित इजरायली दूतावास (Embassy of Israel) हाल ही में एक विज्ञापन के कारण लोगों के निशाने पर आ गया है। दूतावास ने अपने पॉलिटिकल डिपार्टमेंट में मदद के लिए 6 महीने की इंटर्नशिप का विज्ञापन निकाला था। इस विज्ञापन में यह साफ लिखा था कि यह 'अनपेड' (Unpaid) यानी बिना वेतन वाली इंटर्नशिप है। यह बात लोगों को बिल्कुल पसंद नहीं आई, खासकर तब जब यह फुल-टाइम, 6 महीने की भूमिका थी। इस इंटर्नशिप का मकसद छात्रों या हाल ही में ग्रेजुएट हुए लोगों को दूतावास के कामों में मदद करने का मौका देना था, लेकिन इसके बाद भारत में इंटर्नशिप और उचित श्रम प्रथाओं (Fair Labor Practices) को लेकर बहस छिड़ गई है।
इंटर्नशिप में क्या-क्या काम?
विज्ञापन में बताई गई जिम्मेदारियां किसी प्रोफेशनल काम से कम नहीं थीं। इंटर्न को राजनीतिक और भू-राजनीतिक विकास पर गहरी रिसर्च करनी थी, द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करने वाले विधायी बदलावों पर नजर रखनी थी। साथ ही, स्टेकहोल्डर्स से जुड़ना, मीडिया ब्रीफिंग में शामिल होना, संसदीय कार्यवाही को कवर करना और आधिकारिक राजनयिक दौरों में मदद करना भी शामिल था। आलोचकों का कहना है कि इतने बड़े और महत्वपूर्ण कामों के लिए कोई मेहनताना न देना बिल्कुल गलत है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, खासकर 'X' (पहले ट्विटर) पर लोगों ने इस ऑफर को 'शोषण' करार दिया है। कई लोगों ने कहा कि 6 महीने तक प्रोफेशनल लेवल का काम बिना पैसों के करवाना गलत मिसाल कायम करता है। यह भी कहा गया कि इंटर्नशिप सीखने का मौका होता है, लेकिन इतने बड़े काम के लिए उचित भुगतान (Compensation) होना ही चाहिए। लोगों ने भारतीय कैंडिडेट्स के समय और मेहनत की कीमत पर सवाल उठाए हैं।
प्रतिष्ठा पर सवाल?
हालांकि, राजनयिक मिशन (Diplomatic Missions) अपने नियमों के तहत काम करते हैं, लेकिन यह मामला दिखाता है कि भारत में पेशेवर दुनिया में क्या चल रहा है। आजकल युवा छात्र और प्रोफेशनल बिना वेतन के काम करने के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में, दूतावास जैसी संस्था की ऐसी हरकतें उनकी छवि पर बुरा असर डाल सकती हैं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या दूतावास स्थानीय पेशेवर उम्मीदों के हिसाब से चल रहा है।
आगे क्या?
इजरायली दूतावास, स्टॉक मार्केट में लिस्टेड कंपनी नहीं है, इसलिए इस घटना का सीधा शेयर बाजार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन, यह घटना एक केस स्टडी की तरह है कि कैसे सार्वजनिक जांच (Public Scrutiny) किसी प्रतिष्ठित संस्थान की प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकती है। अब देखना यह है कि क्या दूतावास इस पर कोई सफाई देता है, या इंटर्नशिप की शर्तों में बदलाव करता है। यह घटना एक याद दिलाती है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता (Transparency) और उचित व्यवहार (Fair Treatment) कितना जरूरी है।
