भारत का सीधा जवाब
भारत के शिपिंग मंत्रालय ने होरमुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों पर ईरान द्वारा कथित रूप से लगाए जा रहे 'टोल' या 'लेवी' संबंधी खबरों को 'निराधार' बताया है। मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश सिन्हा ने साफ किया कि ऐसे किसी भी टैक्स या शुल्क को लगाने की कोई बात नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर आवाजाही की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है और होरमुज़ जलडमरूमध्य पर भी लागू होता है।
ईरान के कथित 'टोल बूथ' का सच
हालांकि, Lloyd's List की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसी खबरें हैं कि ईरान का इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) होरमुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए एक तरह का 'डी फैक्टो टोल' सिस्टम लागू कर रहा है। रिपोर्ट बताती है कि जहाजों को IRGC से गुजरने की अनुमति और क्लीयरेंस कोड प्राप्त करने के लिए विस्तृत दस्तावेज़ जमा करने होंगे। 13 मार्च के बाद से, कथित तौर पर 26 जहाजों ने इस IRGC-अनुमोदित प्रक्रिया का पालन किया है, और 15 मार्च के बाद से सामान्य मार्ग से कोई आवाजाही नहीं दिखी है।
'मित्र देशों' के लिए खुला मार्ग?
इन सबके बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि 'मित्र देशों' जैसे चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान के लिए जलडमरूमध्य से गुजरना संभव है। तेहरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने भी स्पष्ट किया है कि 'गैर-शत्रुतापूर्ण जहाजों' को, बशर्ते वे ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई में शामिल न हों और सुरक्षा नियमों का पालन करें, सुरक्षित मार्ग मिल सकता है। यह मार्ग ईरानी अधिकारियों के साथ पूर्व समन्वय पर निर्भर करता है।
संयुक्त राष्ट्र की चिंता
इस पूरे मामले पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी चिंता जताई है। उन्होंने जलमार्ग के 'लंबे समय से चले आ रहे बंद' को तेल, गैस और उर्वरकों की आवाजाही में बाधा डालने वाला बताया है और क्षेत्रीय संघर्ष को तुरंत समाप्त करने की अपील की है।