ईरान ने अपने संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को विदेश भेजने से साफ इनकार कर दिया है और साथ ही अमेरिका से तेल प्रतिबंध हटाने की मांग की है। यह भू-राजनीतिक तनाव भारतीय निवेशकों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर हो सकती हैं।
तेहरान ने अपनी परमाणु नीति पर रुख और सख्त कर लिया है। ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि वे अपने यूरेनियम स्टॉकपाइल को विदेश नहीं भेजेंगे। ईरान ने साफ कहा है कि भविष्य में किसी भी बातचीत के लिए अमेरिका को तुरंत उन प्रतिबंधों को हटाना होगा, जो उनके तेल एक्सपोर्ट और पोर्ट ऑपरेशंस को प्रभावित करते हैं।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं जोखिम?
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है, इसलिए ऊर्जा की कीमतों में कोई भी बदलाव सीधे हमारी इकॉनमी को प्रभावित करता है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में 10% से 20% तक की बढ़ोतरी होती है, तो इसका सीधा असर भारत के इंपोर्ट बिल और चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) पर पड़ेगा।
मार्केट पर असर
ऊर्जा की बढ़ती लागत के कारण घरेलू महंगाई (Inflation) बढ़ने की आशंका है, जो मैन्युफैक्चरिंग, ट्रांसपोर्टेशन और केमिकल सेक्टर के लिए चुनौती बन सकती है। फिलहाल, वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ती दूरी ने बाजार के सेंटीमेंट को सतर्क कर दिया है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को ग्लोबल क्रूड ऑयल बेंचमार्क पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है। यदि आपूर्ति (Supply) को लेकर चिंताएं बढ़ती हैं, तो तेल पर निर्भर कंपनियों के शेयरों में भारी वोलैटिलिटी (Volatility) देखने को मिल सकती है। मौजूदा समय में भू-राजनीतिक हलचल और डिप्लोमेटिक अपडेट्स ही बाजार की दिशा तय करेंगे।
