Lipulekh Pass: 7 साल बाद शुरू होगी भारत-तिब्बत बार्टर ट्रेड, पर व्यापारियों के माथे पर चिंता की लकीरें

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AuthorMehul Desai|Published at:
Lipulekh Pass: 7 साल बाद शुरू होगी भारत-तिब्बत बार्टर ट्रेड, पर व्यापारियों के माथे पर चिंता की लकीरें

7 साल के लंबे इंतजार के बाद, 1 अगस्त से भारत और तिब्बत के बीच लिपुलेख पास के ज़रिए सालाना बार्टर ट्रेड (Barter Trade) फिर से शुरू होने जा रहा है। हालांकि, व्यापारियों को सिर्फ तीन महीने की छोटी विंडो मिलने की आशंका है, जिससे माल के नुकसान का खतरा मंडरा रहा है।

7 साल बाद फिर खिलेगी 'बॉर्डर की रौनक'

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित लिपुलेख पास से भारत और तिब्बत के बीच सालों से चली आ रही बार्टर ट्रेड (Barter Trade) एक अगस्त, 2026 से फिर से शुरू हो रही है। यह वो रास्ता है जिससे भारतीय व्यापारी तिब्बत के पुरंग (जिसे तकलाकोट भी कहते हैं) जाकर अपना सामान बेचते थे और बदले में ऊन और पश्मीना जैसी चीजें लाते थे। साल 2019 से कोरोना महामारी के कारण यह व्यापार बंद था, लेकिन अब 7 साल बाद यह फिर से शुरू होने जा रहा है।

छोटी विंडो, बड़ा टेंशन!

व्यापारियों के लिए यह अच्छी खबर तो है, लेकिन साथ ही एक बड़ी चिंता भी लेकर आई है। धर्चुला ट्रेड ऑफिस ने 113 भारतीय व्यापारियों और उनके सहायकों के लिए परमिट जारी कर दिए हैं। लेकिन दिक्कत यह है कि अगस्त महीने से ही व्यापार शुरू हो रहा है, जबकि जुलाई का महीना व्यापार के लिए सबसे अहम माना जाता था।

अब व्यापारियों के पास सिर्फ तीन महीने का समय है, क्योंकि अक्टूबर आते-आते यह रास्ता सर्दियों के लिए बंद हो जाता है। व्यापारियों का कहना है कि देर से शुरुआत होने के कारण तिब्बती खरीदारों की दिलचस्पी सितंबर के बाद काफी कम हो जाती है। ऐसे में, अनुमान है कि लगभग 40% तक माल बिना बिके रह सकता है, जिससे भारी नुकसान का डर है।

सालों से फंसे माल को निकालने की चुनौती

इस बार का व्यापार सिर्फ नए माल को बेचने का ही नहीं है, बल्कि उन व्यापारियों के लिए एक और बड़ी चुनौती है जिनका माल 2019 से तिब्बत के गोदामों में फंसा हुआ है। 7 साल से बंद पड़े इस व्यापार को फिर से शुरू करने का एक बड़ा मकसद यही है कि फंसा हुआ पैसा वापस आ सके। कॉस्मेटिक्स और किराना जैसे सामानों के बदले ऊन और पश्मीना का यह व्यापार कितना सफल हो पाता है, यह देखना होगा।

ऐतिहासिक लिपुलेख पास का सफर

लिपुलेख पास से यह बार्टर ट्रेड कोई नई बात नहीं है। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद 30 साल तक बंद रहने के बाद 1992 में इसे फिर से शुरू किया गया था। 2026 में इसका दोबारा शुरू होना भारत और चीन के बीच संबंधों के सामान्य होने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। पर देखना यह होगा कि क्या यह व्यापार अक्टूबर तक प्री-कोरोना लेवल पर पहुँच पाता है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.