विदेशी फंड को मिली ग्रीन सिग्नल
गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT City) में एक अहम पड़ाव तब आया जब Poornam Asset Management IFSC, जो यूके-आधारित कंपनी है, को पहली विदेशी फैमिली इन्वेस्टमेंट फंड (FIF) के तौर पर रजिस्टर किया गया। यह गिफ्ट सिटी को एक ग्लोबल फाइनेंशियल हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो इंटरनेशनल मनी और कंपनियों को आकर्षित कर रहा है। इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) ने विदेशी फैमिली ऑफिसों के लिए एक फ्लेक्सिबल माहौल बनाने के मकसद से फंड मैनेजमेंट के नियम अपडेट किए हैं। गिफ्ट सिटी आज कई बैंकों, मार्केट इंटरमीडियरीज और 250 से ज़्यादा ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) का घर बन चुका है, जो इसकी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय अपील को दर्शाता है।
भारतीय फैमिली ऑफिसों के लिए अड़चनें?
मगर, जहाँ विदेशी फंड्स के लिए दरवाजे खुल रहे हैं, वहीं भारत के अपने फैमिली ऑफिसों को FIF स्टेटस पाने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। भारत की बड़ी फर्म्स जैसे Catamaran Ventures और Premji Invest ने 2023 में ही गिफ्ट सिटी में FIF रजिस्ट्रेशन के लिए अप्लाई किया था, और Premji Invest को तो शुरुआती मंजूरी भी मिल गई थी। लेकिन, अंतिम मंजूरी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से जरूरी स्पष्टीकरण के इंतजार में अटकी हुई है। RBI को चिंता है कि कैपिटल कंट्रोल्स में ढील देने से टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग को बढ़ावा मिल सकता है, साथ ही देश के एक्सचेंज रेट और फॉरेन रिजर्व पर भी असर पड़ सकता है। इसी रेगुलेटरी सावधानी के चलते डोमेस्टिक FIF अप्रूवल रुके हुए हैं, जबकि विदेशी फर्मों के लिए रास्ता आसान है। नतीजतन, कई भारतीय फैमिली ऑफिस ग्लोबल निवेश के लिए FIF की जगह गिफ्ट सिटी के ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) का सहारा ले रहे हैं।
RBI और IFSCA में टकराव से कन्फ्यूजन
स्थिति तब और उलझ गई जब मार्च 2026 में RBI ने एक नया गाइडेंस जारी किया। इसमें गिफ्ट IFSC में रजिस्टर्ड एंटिटीज को 'रेजिडेंट इंडियंस' मानते हुए सालाना फॉरेन लायबिलिटीज एंड एसेट्स (FLA) रिटर्न्स फाइल करने को कहा गया। यह कदम गिफ्ट सिटी की उस स्टेटस से बिल्कुल अलग है, जो फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के तहत एक फॉरेन ज्यूरिसडिक्शन के तौर पर जाना जाता है। इस टकराव ने वहाँ काम कर रही कंपनियों में भारी कन्फ्यूजन पैदा कर दिया है। लीगल एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह विवाद जनरल पार्टनर्स (GPs) को भारत से दूर, मॉरीशस, सिंगापुर या दुबई जैसे देशों की ओर रुख करने पर मजबूर कर सकता है, जहाँ रेगुलेशन ज्यादा क्लियर हैं। इसके अलावा, ओवरसीज पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (OPI) और ओवरसीज डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (ODI) के बीच का अंतर सिंगल- फैमिली ऑफिसों (SFOs) के लिए एक और बड़ी अड़चन बन रहा है, जो उन्हें मंजूरी मिलने के बावजूद विदेशी निवेश करने से रोक रहा है।
AIFs: एक व्यावहारिक रास्ता
FIF, खासकर डोमेस्टिक फर्मों के लिए, रेगुलेटरी अड़चनों के कारण भारतीय वेल्थ मैनेजर्स अब ग्लोबल निवेश के लिए गिफ्ट सिटी में AIFs का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। ये AIFs, IFSCA की देखरेख में काम करते हैं और ज़्यादा फ्लेक्सिबिलिटी देते हैं। ये फॉरेन करेंसी में ऑपरेट होते हैं और FEMA के तहत नॉन-रेजिडेंट एंटिटीज माने जाते हैं, जो भारत के अंदर SEBI द्वारा रेगुलेटेड AIFs से अलग है। IFSCA के नए फंड मैनेजमेंट रूल्स के तहत नॉन-रिटेल स्कीम्स के लिए मिनिमम कॉर्पस को 5 मिलियन डॉलर से घटाकर 3 मिलियन डॉलर कर दिया गया है, जिससे फंड मैनेजमेंट और ज़्यादा सुलभ हो गया है।
गिफ्ट सिटी के ग्लोबल लक्ष्यों पर खतरा?
मौजूदा रेगुलेटरी माहौल गिफ्ट सिटी के ग्लोबल फाइनेंशियल सेंटर बनने के लक्ष्य के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है, जहाँ डोमेस्टिक वेल्थ को भी ग्लोबल कैपिटल से जोड़ा जा सके। RBI की स्ट्रिक्ट कैपिटल कंट्रोल की चिंताएं और हालिया रेगुलेटरी कन्फ्यूजन के चलते भारतीय फैमिली ऑफिस FIF स्ट्रक्चर का पूरा फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। इससे भारत में निवेश हतोत्साहित हो सकता है। अगर इन समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो भारत सिंगापुर, दुबई और हांगकांग जैसे फाइनेंशियल हब से पिछड़ सकता है, जो ज़्यादा क्लियर रेगुलेशन और प्रेडिक्टेबल माहौल ऑफर करते हैं। यह स्थिति भारत के फाइनेंशियल सेक्टर को ग्लोबल बनाने की सरकार की मंशा और नियामकों के सतर्क रवैये के बीच की खाई को दर्शाती है। इससे डोमेस्टिक वेल्थ मैनेजमेंट की ग्रोथ धीमी हो सकती है और कैपिटल विदेश जा सकता है।
आगे की राह
एक फॉरेन FIF का आना इस बात का सबूत है कि गिफ्ट सिटी का रेगुलेटरी फ्रेमवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी है। लेकिन, इस हब को अपनी पूरी क्षमता तक पहुँचने और भारत को ग्लोबल कैपिटल से जोड़ने के लिए, IFSCA और RBI के बीच के रेगुलेटरी मतभेदों को सुलझाना बहुत ज़रूरी है। डोमेस्टिक फैमिली ऑफिसों के लिए क्लियर और कंसिस्टेंट नियमों की ज़रूरत है ताकि FIF फ्रेमवर्क वास्तव में काम कर सके। इसके बिना, गिफ्ट सिटी शायद सिर्फ फॉरेन मनी के चैनल के तौर पर काम करेगा, न कि भारतीय और अंतरराष्ट्रीय वेल्थ मैनेजमेंट दोनों के लिए एक पूरा प्लेटफॉर्म बनकर।
